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चिंतित है या दुखी हैं तो ये ३ मोटिवेशनल कहानी आप के लिए !

Written by admin

कभी कभी जिंदगी में ऐसी मुश्किलें आ जाती हैं। ऐसे हादसे हो जाते हैं जो हमें तोड़कर रख देते हैं। हम ज़िन्दगी से ही हार जाते हैं मायूस हो जाते हैं। मुश्किलें तो ज़िन्दगी में हजारों आती हैं पर इनसे निकलने का कोई रास्ता ही नहीं नजर आता। ना ही कोई हमारे दर्द को समझ पाता है और ना ही कोई हमारे दुख को दूर कर पाता है। आज हम बात करेंगे ऐसी तीन कहानियों की जो आपको हर मुश्किल में रास्ता दिखाएंगे। आपके मन के हर दर्द को दूर करेंगी।

1.  सबसे पहले कहानी एक शहर में बहुत धनी व्यक्ति था बहुत बड़ा व्यापार था उसकी ज़िन्दगी में हर प्रकार का सुख था हर प्रकार का वैभव था लेकिन एक दिन उसकी जिंदगी में ऐसा वक्त आया। उसे व्यापार में बहुत बड़ा घाटा पड़ा। उसकी सारी संपत्ति बिक गई। जो भी उसने ज़िन्दगी भर मेहनत करके कमाया था वो सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे हालातों में वो इतना टूट गया उसने मन में सोचा कि ऐसी ज़िन्दगी से तो बेहतर है मैं आत्महत्या कर लूं खुद को ही खत्म कर दूं। मन में ऐसा सोच कर के वो अपने नगर के बाहर एक पहाड़ी की चोटी से कूदने के लिए गया। जब वो उस पहाड़ी की चोटी से कूदने वाला था तो वहां पर एक महात्मा बैठे थे।

उन्होंने उससे पूछा कि तुम यहां से क्यों कूदना चाहते हो। उस व्यक्ति ने कहा एक समय था जब मैं बहुत धनी व्यक्ति था लेकिन ज़िन्दगी ने ऐसा खेल खेला है मेरे साथ मेरा सब कुछ मुझसे छीन लिया। आज मेरे पास कुछ भी नहीं है और ऐसी ज़िन्दगी को जीकर मैं क्या करूंगा। इससे तो अच्छा है मैं अपने आप को ही खत्म कर दूं तो महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा कि तूने धन को खोया है अपने आपको नहीं खोया। पैसा कमाने का हुनर तुझमें कल भी था और आज भी है ये वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता। कल अच्छा था आज मुश्किल है और विश्वास रखना कल फिर वही अच्छा वक्त तुम्हारी ज़िन्दगी में जरूर आएगा। आज मुश्किल है कल अच्छा आएगा।

अरे वक्त तो है बदल ही जाएगा उम्मीद मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा है और अगर आपमें हौसला है तो हर तूफान में भी किनारा है ये मुश्किल वक्त तुझे तोड़ने के लिये नहीं आया है ये तुझे और भी बेहतर बनाने के लिए आया है। यह तेरी हिम्मत और तेरे हुनर का इंतज़ाम लेने आया है तो तू हिम्मत मत हार और अपने घर वापस जा। और पहले की तरह मेहनत करके जो कुछ भी तेरे पास था उसे वापस हासिल कर उस महात्मा की ऐसी बातों को सुनकर उस व्यक्ति के अन्दर एक नया जोश आ गया कि ये सही कह रहे हैं धन ही खत्म हुआ है मैं खतम नहीं हुआ हूं। क्या मेरी ज़िन्दगी मेरी पहचान सिर्फ धन से ही है।

धन मेरी वजह से था। मैं धन की वजह से नहीं हूं और मैं चाहूं तो फिर से वापस धन कमा सकता हूं। वो व्यक्ति वापस नगर में आया और महात्मा की सारी बातें मानकर उसने मेहनत करना शुरू किया और वापस एक धनवान व्यक्ति हो गया।

यह कहानी हमें शिक्षा देती है। वक्त चाहे कितना भी मुश्किल क्यों न हो वह गुजर ही जाता है वह बदल ही जाता है। अगर कभी आपकी ज़िन्दगी में भी मुश्किलें आए परेशानी आए तो वही वक्त होता है। खुद को संभालने का खुद की हिम्मत को खुद की ताकत को पहचाने का। तो अपने मुश्किल वक्त से घबराकर पीछे मत काटो बल्कि उससे लड़कर आप ज़िन्दगी में आगे बढ़ते रहो

दूसरी कहानी एक बार एक पिता पुत्र रात्रि को भोजन के लिए बैठे और जब उनकी थाली में भोजन आया तो उस लड़के की मां ने प्लेट में सब्जी और जली हुई रोटी दी। जब उस लड़के की मां को एहसास हुआ कि रोटी जली हुई है तो वो इस बात के लिए अपने पति और बेटे से माफी माँगने लगी तो उसका पति उससे कहने लगा तुम बिलकुल भी चिंता मत करो मुझे जली हुई कड़क रोटी बेहद पसंद है। इस बात को सुनकर उसके बेटे को बहुत अचरज हुआ।

उसने अपने पिता से पूछा क्या आपको सच में जली हुई रोटी पसंद है तो उसके पिता ने अपने बेटे से कहा तुम्हारी मां ने आज सारा दिन काम किया है और वो सचमुच बहुत थकी हुई थी। वैसे भी एक जली हुई रोटी किसी को ठेस नहीं पहुंचा सकती लेकिन कठोर और तीखे शब्द जरूर चोट पहुंचाते हैं। उसने अपने बेटे से कहा तुम्हें पता है ये ज़िन्दगी कमियों से भरी हुई है। ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसमें कोई कमी नहीं हो कोई दोष नहीं हो और मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी में यही सिखाए कि एक दूसरे की गलतियों को स्वीकार करना सीखो उन्हें अनदेखा करना सीखो एक दूसरे को उनकी कमियों के साथ पसंद करना सीखो तभी आप अपने संबंधों में सफल हो पाएंगे तभी आपके संबंध खुशहाल रह पाएंगे।

ये कहानी भी हमें शिक्षा देती है। अगर हम लोग। सारी जिन्दगी में एक दूसरे को ऐसे ही माफ करना सीख जाएं। एक दूसरे की कमियों पे एक दूसरे के दोषों पे हम एक दूसरे को कठोर और कड़वे शब्द ना कहें बल्कि एक दूसरे का सहारा बने। लेकिन जब हम किसी इन्सान की गलतियों और कमियों को दिल में बिठा कर बैठ जाते हैं ना तो उससे हमारी सारी ज़िन्दगी में कड़वाहट फैल जाती है। हमारे रिश्तों में कड़वाहट फैल जाती है। ज़िन्दगी में ये सारी बातें तो आती रहेंगी लेकिन चुनाव आपका है कि आप उसमें खुश रहते हैं या आप उसमें दुखी होकर ख़ुद को परेशान करते हैं।

 तीसरी कहानी एक पिता ने अपने गुस्सैल बेटे से तंग आकर उसे कीलों से भरा हुआ एक थैला देते हुए कहा तुम्हें जितनी बार भी क्रोध आए तुम थैले में से एक कील निकालकर उसे बाड़े में ठोक देना। बेटे को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने कील बाड़े में जाकर बाड़े की दीवाल पर ठोक दी और जब भी उसे गुस्सा आता वो हमेशा ऐसा ही करता। लेकिन धीरे धीरे उसे समझ में आने लगा कि कील ठोकने की मेहनत करने से तो अच्छा है वह अपने गुस्से पर ही कंट्रोल कर ले और धीरे धीरे उसके कील ठोकने की संख्या कम होने लगी।

एक दिन ऐसा भी आया कि उसने सारे दिन में एक भी कील नहीं ठोकी। उसने ये बात बहुत खुशी खुशी अपने पिता को बताई। फिर उसके पिता ने कहा जिस दिन तुम्हें ये लगे कि आज तुमने बिल्कुल भी गुस्सा नहीं किया है तो उस बाड़े की दीवाल में से जा करके तुम एक एक करके कील फाड़ते जाना बाहर निकाल दे जाना। बेटा ऐसा ही करने लगा और एक दिन ऐसा भी आया कि उसने वाल में एक भी कील बाकी नहीं बची। उसने खुशी खुशी ये बात अपने पिता को बताई। पिता उस लड़के को लेकर बाड़े में आए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा क्या तुम ये छेद भर सकते हो। बेटे ने कहा नहीं पिताजी। पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा इससे तुम क्या समझे कि क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं जिसको भरना असंभव हो जाता है जिसे तुम सारी ज़िन्दगी में भी नहीं भर सकते। ये कहानी भी हमें शिक्षा देती है जब आपकी ज़िन्दगी में ऐसे हालात आ जाएँ ऐसी परिस्थतियां आ जाएं या लोग आपके साथ ऐसा व्यवहार करें जिससे आपको दुख पहुंचे।

जिससे आपको गुस्सा आता हो और उस गुस्से में आप दूसरों के दिल पे चोट पहुंचाते हैं उन्हें कठोर शब्द कहते हैं आप तो गुस्सा करके अपनी भड़ास निकाल लेते हैं लेकिन वो लोग आपके द्वारा कहे गए उन शब्दों को कभी नहीं बोल पाते हैं। वो जब भी आपकी ज़िन्दगी में ऐसी परिस्थितियां आएं जो आपके मन को अच्छी ना लगे तो उस समय वे ना आप हिम्मत हारे ना आप अपना गुस्सा दिखाएं बल्कि आप उस समय पे अपनी समझदारी और अपने धीरज से काम लें।

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