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12 Best Romantic Love Story in Hindi 2022

Best Romantic Love Story in Hindi
Written by admin

Romantic Love Story in Hindi

यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही ख़ास होगा क्योंकि इसमें 12 Best Romantic Love Story in Hindi 2021 का एक अनोखा कलेक्शन है। ये कहानियाँ प्रेम प्रसंग और प्यारे-रिश्तों पर लिखी गयी दिलचस्प कहानियाँ हैं। इन रोमांटिक प्रेम कहानियों को पढ़ने के बाद आपको प्यार के एक नए रूप का पता चलेगा।

“प्रेम केवल दो जिस्म का एक होना नही बल्कि उसका प्रथम अहसास और आभाष होना भी प्यार ही होता है।”

दोस्तों कहते हैं प्यार अगर सच्चा हो तो रंग लाता ही है रवि को उसका सच्चा प्यार मिला की नहीं, जानने के लिए जरूर पढ़ें Best Romantic Love Story in Hindi.

“अक्सर दिल टूटने के बाद इंसान एक जिंदा लाश बन जाता है। प्यार पर से उसका भरोसा ही उठ जाता है। फिर वह किसी पर दोबारा भरोसा नहीं कर पाता। एक बार अगर भरोसा टूटा तो ये नहीं की बार बार भरोसा टूटेगा । इंसान वही है जो एक भरोसा टूटने के बाद भी भरोसा करना न छोड़े । क्योकि यही जिंदगी है। ”

प्यार के रास्ते कोई अनजान क्या जाने।
इश्क किसे कहते हैं कोई नादान क्या जाने।
उड़ाकर साथ ले गए घर परिंदों का।
कैसे बनें ये घोसले ये तूफान क्या जाने।।

प्यार क्या है?

अमरता की निशानी या फिर सिर्फ एक जवानी जिसको हम जीना चाहते हैं या जिसको हम अथक प्रयास करके भी पाना चाहते हैं पर वह मिलता नहीं है। क्या प्यार को जीता भी जा सकता है ? प्यार की ज़िन्दगी में अहमियत क्या है ? क्या किसी को कभी सच्चा प्यार मिला है ? या मिल सकता है ? सच्चा प्यार क्या होता है ? इन सभी प्यारे सवालों के जवाब पाने के लिए आप निचे लिखी Best Romantic Love Story in Hindi को पढ़ना न भूलें !


 उसकी पनाह में- Love Story in Hindi

दोस्तों मैं आपका अपना समीर, समीर मीन्स हवा जो कभी नहीं ठहरता । कॉलेज में आते ही उसका सबसे शोख और मनमौजी भरा यही अंदाज हुआ करता था । मैंने उसे कभी किसी बात को लेकर गंभीर नहीं देखा था । जब भी वह दिखा ख्वाइशों की आवाज अंदाज जैसे उसकी लाइफ में गंभीरता नाम की कोई चीज नहीं , ना उसे अपने वर्तमान की ना भविष्य की चिंता ।

उसका यही अंदाज मुझे खलता है,,, ना किताबों से दोस्ती ना कालेज से कोई खास लगाओ,,, फिर भी ऐसा क्या था जो मैं उसकी तरफ खींचती चली गई और आज उसकी कहानी लिखने बैठी हूं । उस दिन मेरा क्लास में दिल नहीं लग रहा था सोचा जाकर कैंटीन में कुछ समय गुजार लूं । अक्सर हमारे स्टूडेंट क्लास बंक करके कैंटीन का ही रुख करते हैं, कैंटीन में जाकर देखा तो सब बैठकर कालेज के प्रोफेसर की नकल उतार रहे थे,,,, कोई रीता मैम के स्टाइल का दीवाना था कोई प्रोफेसर राम के तीखे व्यंग पर नाराज था ।

मैंने एक नजर सबकी तरफ दौड़ाई समीर बैठकर ठहाके लगा रहा था,,,, उसका यू सबके मजाक में शामिल होना मुझे बड़ा खराब लगता था । ऐसा नहीं है कि वह मेरा दोस्त था या मुझे उससे कोई एक तरफा लगाव था फिर भी ना जाने क्यों मेरे अंदर बैठी आत्मा दुखी हो जाती थी ।
उसके पूरे हिस्से में बस उसकी आंखें ही थी जो किसी को भी पसंद आ जाती और उसके व्यक्तित्व को आकर्षित करने के लिए शायद इतना काफी था ।

मैंने कई बार सोचा उससे कह दूं अपने लिए कुछ सोचो आगे क्या करना है फिर लगता मैं क्यों कहूं वह मेरी बात भला क्यों मानेगा ।
जब ऐसा कुछ नहीं था तो मैं उसकी कहानी क्यों लिख रही हूं,, कभी-कभी कहानी लिखने के लिए खास किरदार की ही जरूरत नहीं होती,, हमें आम को भी खास बनाना पड़ता है ।

कुछ ही दिन पहले मेरी नई जॉब मतलब मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश जिसमें मैंने अपनी पूरी जिंदगी दे दिया । मेरी नई जॉब मतलब मैंने निहारिका अवस्थी आर्य महिला पीजी कॉलेज की नई प्रिंसिपल । खास बात यह है कि आज आप मेरे अपने शहर बनारस में थी । जहां की खुशबू हवाओं में घुल के एक नया रंग दे जाती है । आज कॉलेज का पहला दिन था मैं कभी अपना मिजाज ज्यादा गर्म नहीं रखती, रुख देखकर अक्सर सब मुझसे जुड़ जाते हैं ।

मुझे बहुत खुशी हुई मैंने सभी क्लास का दौरा किया सभी टीचर से मिली बहुत अच्छा लगा । अचानक त्रिपाठी सर ने एक पेओन को बुलाया मेरे लिए कुल्हड़ वाली चाय का इंतजाम करने के लिए । कुल्हड़ वाली चाय का एक अपना मजा होता है । त्रिपाठी सर मुस्कुराते हुए बोले मैंने उनको अपना सिर हिलाकर स्वीकृति दे दिया । कुछ देर बाद वो प्यून लौटा उसने चाय रख दी अचानक से उसके चेहरे पर मेरी नजर पड़ी । हा कहीं तो देखा है मैंने पर कहां याद साथ नहीं दे रही थी ।

मैंने उसका चेहरा गौर से देखा उसकी वही आंखें शांत सा चेहरा कुछ ख्याल करूं पर कुछ याद नहीं आ रहा था । वह चला गया, मुझे उसकी तरफ गौर से देखते हुए त्रिपाठी सर बोल पड़े मैम 4 साल से अपने कॉलेज में यह पियून है कभी कोई शिकायत का मौका नहीं दिया ।
सारे काम खुशी-खुशी करता है जैसे कोई गम नहीं है । सारे कालेज में सबका प्रिय है । कोई गम नहीं यह मेरा ही वाक्य था कभी किसी के लिए पर वह कौन था उसका चेहरा याद नहीं । मैंने अपने दिमाग पर बहुत जोर डाला पर कुछ याद नहीं आया । एक दिन वो फिर आया नमस्ते किया और कुल्हड़ वाली चाय रखकर चला गया,,,,, अब रोज आता और मेरे केबिन में चाय रखकर चला जाता ।

एक दिन मैंने उसे रोका और उसका नाम पूछा तो वह बोला मैडम जी मेरा नाम समीर है । अचानक से कैंटीन का वो समीर याद आ गया जो सब को कहता फिरता था मैं समीर जो कभी नहीं ठहरता । फिर मैंने सोचा की यह समीर की तरह लगता है पर कोई लगने से समीर तो नहीं हो जाता । एक दिन मै बगीचे में यूं टहल रही थी अचानक से त्रिपाठी सर आ गए मैंने उनसे ना जाने क्यों समीर के बारे में पूछ लिया, त्रिपाठी सर बोले क्या हुआ मैम कोई गलती कर दी क्या उसने , मैंने कहां नहीं बस आज चाय मिस कर दी तो उसकी याद आ गई वैसे समीर कहां का है ।
त्रिपाठी सर बोले शायद गुजरात से है मैंने ही उसे यहां रखवा दिया मेरा पड़ोसी है ।

बीबी गुजर गई है एक छोटी सी बच्ची है । बेचारा अकेले परवरिश कर रहा है कई बार मैंने समझाया पर मेरी बात हंसकर टाल देता है ।
कभी आप कहे शायद मान जाए । गुजरात सुनकर चक्कर आने लगा समीर गुजरात बीवी बच्चे सब घूमने लगा । मैं अपने रूम में बैठी हुई सोच रही थी वह इतनी कम उम्र में शादी तो नहीं कर सकता और उसकी बीवी को क्या हो गया । वो गुजरात से यहां क्यों आ गया यही सब । 1 दिन समीर मुझे बाजार में दिख गया और नमस्ते कर लिया ।

मैंने उसे पास के गार्डन में चलने को कहा वह बोला मैम आप के साथ । मैंने उसकी वही बड़ी बड़ी आँखों में झाकते हुए बोला समीर या कॉलेज नहीं है यहां मैं वही निहारिका हूं गुजरात वाली और तुम वहीं समीर हो ।  वह मुस्कुरा दिया और चल पड़ा । समीर आपने मुझे पहचान लिया और कितनी पुरानी बात है जब हम पीजी में कभी साथ थे । निहारिका शायद मुझे देर हुई पहचानने में पर तुम तो पहचान गए फिर क्यों नहीं बोले ।

समीर कैसे बोलता आप कहां प्रिंसिपल बन गई और मैं,  उसका यह अधूरा वाक्य मुझे खामोश कर गया । कुछ देर हम साथ रहे फिर वह चला गया ।  बस ऐसे कभी-कभी बातें होने लगी । 1 दिन वह घर जल्दी चला गया फिर कुछ दिन नहीं आया मुझे उसकी चिंता होने लगी मैंने त्रिपाठी सर से पूछा तो वह बोले उसकी बेटी की हालत थोड़ी नाजुक है वह कुछ दिन के लिए छुट्टी पर है । मैंने त्रिपाठी सर से उसका पता लिया और शाम को कॉलेज के बाद पहुंच गई ।

दरवाजा खटखटाया और दरवाजा एक 5 साल की बच्ची ने खोला और बोला पापा कोई आंटी आई है ।  मैंने उसे गोद में लिया और अंदर चली गई. समीर बर्तन धोने में बिजी था वह मुझे देख देख कर चौक गया । हम बैठे और कुछ बातें हुई । मैंने पूछा यह तुम्हारी ही बेटी है ना वह बोला हां क्यों कोई शक । मैंने कहा नहीं बस सोच रही थी वही समीर होना जो कहीं नहीं ठहरते थे इतनी जल्दी शादी और एक बच्ची भी है तुम्हारी पत्नी के बारे में सुनकर बुरा लगा ।

वह मुस्कुरा दिया और बोला कोई बात नहीं । मुझे उसका इस बात पर मुस्कुराना अच्छा नहीं लगा । मैं खामोश थी उसकी बेटी और समीर दोनों मुझे बाहर तक छोड़ने आए । मैं उसके घर से निकलकर सड़क तक पहुंची थी कि मेरा पैर एक पत्थर से टकराया और मैं गिर पड़ी, सामने से एक बुजुर्ग महिला आ रही थी उन्होंने मुझे उठाया और अपने घर ले जाने की जिद करने लगी । मैं इनकार नहीं कर सकी,,,, बातों बातों में मैंने उन्हें समीर के घर आने के बारे में बताया वह मुस्कुरा दी ।

बोली अच्छा तो उसने तुम को भी गुमराह किया । मैं तो हैरान थी उनकी बात सुनकर । वह बताने लगी बेटा मैं गुजरात के हॉस्पिटल में काम करती थी,,, समीर वहां एक बार किसी काम के सिलसिले में आया था, एक प्रेमी जोड़े ने विवाह तो कर लिया था पर जब बच्ची पैदा हुई तो उसे छोड़कर वहां से भाग गए उस दिन जो तमाशा हुआ कि पूछो मत । वह मासूम सी नन्ही सी जान को सब बस कोस रहे थे तभी समीर वहां आया उसने उसे गोद में लिया, कुछ कागजी कार्रवाई की और उसे गोद ले लिया ।

वह एक नौजवान लड़का था उसके इस फैसले को सभी ने गलत ठहराया । पर उसे कोई परवाह नहीं थी किसी की,, कभी-कभी हॉस्पिटल में अपनी बेटी के साथ आता, बस इसी तरह मैं उसे जानने लगी । वह बहुत ही प्यारा बच्चा है उसके भी मां-बाप नहीं शायद उसने वह दर्द झेला है । मैं यही बनारस की हूं आई तो समीर को भी लेते आई और त्रिपाठी जी से बोलकर काम पर लगवा दिया । दिनभर कॉलेज में रहता है तो बच्ची को मेरे पास छोड़ जाता है मेरा भी दिल लगा रहता है । यह एक सच है जो वह किसी को नहीं बताता सब जानते है वह उसकी बच्ची है और बीवी नहीं है । मैंने उस अम्मा से कुछ और बात की और फिर चल पड़ी ।  मन में हजारों सवाल थे कि एक लड़का अपनी पूरी जिंदगी किसी बच्ची के लिए दे सकता है । जब यहां अपने मां बाप अपने बच्चों को छोड़कर चल दे रहे हैं ।

वह किसी तरह की कोई सहानुभूति नहीं लेता बस यूं ही हवा की तरह सबको खुद में बिखरा कर भी समेटे है । ऐसे लोगों को समझदार देखा बड़ी-बड़ी बातें करते देखा लेकिन आज समीर के सामने ना जाने क्यों मेरा कद बहुत छोटा हो गया । शायद मैं भी यह नहीं कर पाती । वहीं कालेज का समीर जिसे मानो कोई गम नहीं खुद में समेट कर सब कितना खुश लगता, शायद जिंदगी में कुछ दर्द सब नहीं बांट सकते । जिनसे उम्मीद ना हो वह अक्सर कुछ सबक दे जाते हैं ।


 हाई स्कूल वाला प्यार- Love Story in Hindi

कम उम्र में प्यार होना, प्यार की भावनाओं को समझना, प्यार की तरंगों में घुलना मिलना स्कूल के समय में ही हो सकता है। स्कूल का प्यार तो नसीब से मिलता है। आज की कहानी के पात्र शौर्य और निधि दोनों ने स्कूल से ही प्यार के सुर बजाने शुरू कर दिए थे। पर निधि तो प्यार करना ही नहीं चाहती थी। उसे लड़के प्यार करते अच्छे नहीं लगते थे। वह लड़कों को सिर्फ मदद करते हुए ही देखना चाहती थी। पर ऐसा क्या हुआ कि निधि शौर्य के बिना एक पल भी नहीं रह सकती थी।

आइए पढ़ते हैं एक लव स्टोरी ………

निधि मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करती थी। निधि के पापा कपड़े की दुकान चलाया करते थे। निधि तीन भाइयों में छोटी थी। साथ ही निधि की खूबसूरती किसी को भी अपना दीवाना बना सकती थी। जो कोई लड़का निधि को देख लेता तो उसकी खूबसूरती में अपने सपने सजाने लगता। पर निधि का स्वभाव तीखी मिर्च से कम नहीं था। निधि नहीं चाहती थी कि कोई लड़का उसका बॉयफ्रेंड बने।पर निधि इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि उसके साथ ऐसी घटना घटने वाली है जिससे वह एक लड़के के लिए तड़प उठेगी।

आइए जानते हैं निधि और शौर्य का मिलन कैसे हुआ।

निधि को अपने स्वभाव में जीना अच्छा लगता था। अपने फ्रेंड्स में अपने स्वभाव को लेकर काफी चर्चित थी। 1 दिन निधि स्कूल जाने के लिए बस स्टॉप पर खड़ी थी। बहुत इंतजार करने के बाद भी बस नहीं आई। निधि परेशान होने लगी उसे लगने लगा आज तो स्कूल छूट जाएगा। कितनी पढ़ाई डिस्टर्ब हो जाएगी। ऐसे विचार कर ही रही थी कि शौर्य बाइक से स्कूल की तरफ ही जा रहा था। निधि को परेशान देखकर उसने अपनी गाड़ी रोकी और निधि से कहा, आज बस नहीं आएगी, बस पीछे खड़ी है. शायद खराब हो गई है। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें स्कूल छोड़ सकता हूं। मै तुम्हारे स्कूल की तरफ ही जा रहा हूं, और मैं वही पास ही हाई स्कूल में पढ़ता हूं।

शौर्य अपने स्कूल में सबसे होनहार व टॉपर लड़का था। उसका नाम पूरे शहर में था। हर लड़का लड़की उसका नाम जानते थे, पर बहुत कम लोग ही उसे पर्सनली जानते थे। निधि भी उन स्टूडेंट्स में थी जो शौर्य के नाम की फैन थी।

निधि ने कहा, हाई स्कूल में मैं तो किसी लड़के को नहीं जानती पर क्या तुम शौर्य को जानते हो?

शौर्य ने पूछा कौन शौर्य।

निधि ने कहा शायद तुम अपने ही स्कूल के टॉपर को नहीं जानते हो। तो मैं आप पर कैसे यकीन कर लूं कि आप हाई स्कूल में ही पढ़ते हो। ऐसे ही किसी लड़के के साथ नहीं जा सकती मैं।

शौर्य निधि की मासूमियत पर हंसता है और कहता है, अरे, आप यकीन मानिए हइस्कूल में ही मैं पढ़ता हूं। आप निश्चिंत होकर बैठ जाइए मैं आपको स्कूल छोड़ देता हूं।

निधि ने फिर मना कर दिया।

शौर्य ने कहा, क्या अगर हमारे स्कूल का टॉपर शौर्य खुद आपको लेने आए तो क्या आप उसके साथ चली जाओगी।

निधि ने तपाक से कहा, बिल्कुल चली जाऊंगी।

शौर्य ने कहा अच्छा बताओ तो उसे पहचानोगे कैसे।

इस पर निधि चुप हो गई।

उसने कहा, हां बस मैं उसे पहचान लूंगी। निधि ने ऐसे ही अनमने मन से कहा।

शौर्य ने कहा, तुम कैसी लड़की हो, शौर्य को फॉलो करती हो पर उसे कभी देखा ही नहीं, और अगर तुम मुझसे पहले देख लेती तो अब तक तुम स्कूल पहुंच चुकी होती।

निधि ने आश्चर्य से पूछा, क्या, वह कैसे?

शौर्य ने कहा, अरे मैडम, शौर्य, हाई स्कूल का टॉपर और तुमने मुझे पहचाना नहीं। अब बैठ जाओ हमें स्कूल के लिए देरी हो रही है।

निधि ने कहा, अरे वाह क्या नाम बताया आपने, मतलब तुम मुझे बैठाने के लिए अपने आपको अब हाई स्कूल का टॉपर बताने लगे हो। तुम्हें क्या मैं बेवकूफ लगती हूं। जाओ यहां से, नहीं जाना तुम्हारे साथ।

शौर्य अब अपने सिर को पकड़ते हुए कहता है, हे भगवान इस लड़की को मैं कैसे समझाऊं कि मैं ही शौर्य हूं। शौर्य को एक आईडिया आया। शौर्य के पास उस समय मोबाइल नहीं था। अब वह कैसे उसे समझाएं। तब शौर्य ने निधि से कहा, क्या तुम्हारे मोबाइल में इंटरनेट चलता है।

निधि ने कहा, बिल्कुल चलता है।

शौर्य ने कहा, वेरी गुड आप एक काम करो इंटरनेट पर हमारी हाई स्कूल की ऑफिशियल वेबसाइट खोलो। वहां पर मेरी फोटो मिल जाएगी। तब तुम्हें यकीन हो जाएगा। निधि ने तुरंत सर्च किया तो चकित रह गई और अपनी फालतू की बातों पर पछताने लगी।

निधि ने कहा सॉरी मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हें पहले कभी देखा नहीं था। इसलिए पहचान नहीं पाई प्लीज मुझे माफ कर दो।

शौर्य ने कहा, थैंक गॉड, तुम्हें अब तो यकीन हुआ। चलो अब बैठ जाओ हमें काफी देर हो चुकी है। निधि अब तुरंत शौर्य के साथ बाइक पर बैठकर स्कूल के लिए निकल पड़ी। दिन भर निधि स्कूल में शौर्य के बारे में सोचती रही। अपने को सौभाग्यशाली समझने लगी। कि आज शहर के टॉपर ने मुझे लिफ्ट दी।

शौर्य किसी काम से निधि के स्कूल में आ जाता है। तो सभी बच्चे उसे देखने के लिए भीड़ लगा देते हैं। निधि दूर से ही शौर्य को देख रही थी। अब निधि की नजर शौर्य को मदद की फीलिंग से नहीं देख रही थी। वह चाहती थी कि शौर्य उस से खूब बातें करें।
तभी शौर्य की नजर दूर खड़ी निधि पर पड़ी। शौर्य निधि की तरफ जाने लगा। निधि, शौर्य को अपनी तरफ आते देख सब सुध-बुध भूल चुकी थी और उसे नमनामि आंखों से देखने लगी। शौर्य ने निधि से कहा, कैसी हो मैडम, अब तो आप मुझे पहचान लोगे ना। शौर्य के ऐसा कहने पर दोनों खूब हंसते हैं।

शौर्य ने कहा मैडम आपने अपना नाम नहीं बताया। निधि ने अपना नाम बताया।

शौर्य ने पूछा, तुम रोज बस से ही आती हो।

निधि ने कहा, हां।

शौर्य ने कहा, अगर आपको बुरा नहीं लगे तो आप मेरे साथ कल से बाइक पर आ सकती हो।

अगले दिन रविवार था और निधि को याद ही नहीं रहा कि आज रविवार है। वह तो शौर्य से मिलने बस स्टॉप पर जा पहुंची। शौर्य को भी निधि की मासूमियत, निधि की बातें, उसका बात करने का तरीका और सुंदरता ने रविवार का दिन भुला दिया वह भी बस स्टॉप पर पहुंच गया। निधि पहले ही बस स्टॉप पर पहुंच चुकी थी। शौर्य ने देखा निधि आज बड़ी खूबसूरत दिख रही थी। शौर्य ने कहा, चले स्कूल।

निधि ने कहा, हां चलो। पर दोनों ने देखा आज स्कूल की एक भी बस क्यों नहीं आ रही। तभी निधि को अचानक याद आया कि आज तो संडे है। निधि ने कहा आज संडे है। शौर्य ने कहा, तुम्हें पता था तो आज आई क्यों।तभी निधि ने कहा, तुम क्यों आए हो। दोनों बाइक से उतर कर बस स्टॉप पर 3 घंटे तक बातें करते रहे। दोनों अपने प्यार को जाहिर करने लगे और खूब खुशी से साथ साथ रोज स्कूल जाने लगे। यह एक प्यार था जो दोनों तरफ से बिना कहे, बिना बताए एक ही क्षण में हो गया।


 सम्बन्ध – Love Story in Hindi

यह कहानी माही और कृष्णा की है। वैसे तो इनके मध्य नाम दिए जाने जैसा कोई रिश्ता नहीं था, किंतु दिल का संबंध इतना गहरा था कि एक को तकलीफ होती तो दूसरे को दर्द जरूर महसूस होता था। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे अवश्य होते हैं। इन का होना अनिवार्य तो नहीं किंतु यदि वह होते हैं तो व्यक्ति कभी अकेला महसूस नहीं करता है।

माही और कृष्णा दोनों ही शादीशुदा थे, किंतु दोनों को जीवनसाथी स्वयं से विपरीत प्रकृति के मिले। विपरीत प्रकृति या स्वभाव कुछ भी कहा जा सकता है क्योंकि माही और कृष्णा दोनों को बाहय सौंदर्य से ज्यादा पसंद था आंतरिक सौंदर्य। आंतरिक सौंदर्य था सूरज का उगना और डूबना देखना, पानी की आवाज, बारिश में भीगना, नदी के किनारे बैठना जो भी प्रकृति के समीप ले जाए वह हर एक कार्य करना और मानवीय मूल्यों जैसे दया, प्रेम, कृतज्ञता और चाहे फिर किसी का ख्याल रखना हो हमें दोनों के मध्य कोई ना कोई समानता अवश्य ही दृष्टिगत हो जाती थी।

माही और कृष्णा की पहली मुलाकात गरबा क्लासेस में हुई। जहां कृष्णा गरबा सिखाता था और माही उस की छात्रा थी। माही बहुत खूबसूरत थी उसकी गहरी काली आंखें, लंबे बाल, लंबा कद्, छरहरी काया और प्रत्येक कार्य करने या बात करने का सुव्यवस्थित ढंग कुल मिलाकर जो अक्सर लोगों द्वारा कहा जाता है कि ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत से बनाया होगा इसको। ऐसा ही बहुत सारी खूबियों का सम्मिश्रण थी माही।

सभी लोगो को लगता था कि कृष्णा माही की खूबसूरती के कारण उसकी तरफ आकर्षित हो गया था परंतु यह बात पूर्णतया असत्य ही प्रतीत होती है मुझे क्योंकि कृष्णा भी तो बेहद ही आकर्षक छवि रखता था और ऐसा पहली बार थोड़े ही था कि कृष्णा किसी खूबसूरत लड़की को गरबा सिखा रहा हो। माही और कृष्णा के मध्य आकर्षण से प्रेम तक पहुंचने वाले इस संबंध में लालसा या शारीरिक रचना की पूर्ति करने वाला भाव दृष्टिगत नहीं होता था।

माही कृष्णा से गरबा सीखने शाम की क्लास में आती थी।

कृष्णा को सभी लोग बहुत पसंद करते थे। क्लासेज ख़त्म होने के बाद भी कृष्णा सर हमें यह स्टेप सिखा दीजिए यह स्टेप कैसे करना है, इस प्रकार के सवालों से कृष्णा सर घिरे रहते थे। उस दिन शाम को भी कृष्णा सबकी परेशानियों का हल बता रहा था। तभी प्यारी सी आवाज में किसी ने पीछे से कहा, कृष्णा सर क्या आप मुझे कल वाली स्टेप बता सकते हैं। कृष्णा ने पीछे मुड़कर देखा तो, एक सुंदर सी लड़की मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रही थी। यह माही की कृष्णा से पहली बार हुई बात थी।

माही के बात करने का तरीका बेहद ही प्यारा था हम सब भी उसे जब बात करते थे तो वह बड़े ही प्यार से जवाब देती थी। कृष्णा ने माही को कई स्टेप्स सिखाए और माही बहुत जल्दी सीख़ भी गई तो कृष्णा ने कहा अरे वाह जल्दी सीख गई तो कल वाली स्टेप क्यों नहीं सीख पाई थी। माही ने कहा सर मैं कल नहीं आ पाई थी इसलिए मुझे सीखनी थी। कृष्णा ने कहा आपको कुछ भी स्टेप सीखनी हो तो व्हाट्सएप ग्रुप मैं जुड़ सकते हो। ग्रुप में रोज के वीडियो भेजे जाते हैं। माही ने कृष्णा को अपना मोबाइल नंबर दिया और धन्यवाद कह कर चली गई।

रोज कृष्णा और माही के मध्य थोड़ी बहुत बात हो जाती थी। क्योंकि माही बहुत अच्छा गरबा करती थी इसलिए कृष्णा ने उससे पूछा कि क्या तुम आरती करने के लिए गरबा प्रैक्टिस करना चाहोगी। माही ने कहा हां सर, मैं बिल्कुल करूंगी। कृष्णा ने माही से कहा कि आरती करने वाले ग्रुप को अलग से तैयारी करनी होती है तो कल से तुम इस बैच के बाद रुकना। माही ने आने के लिए सहमति गर्दन हिला दी। माही और कृष्णा एक दूसरे के साथ प्रैक्टिस के कारण और अधिक वक्त व्यतीत करने लगे। दोनों के मध्य नृत्य ने कैसा तालमेल बैठा दिया था कि बिना बोले वह एक दूसरे के हाव भाव से ही सब समझ जाते थे।

बातें होने लगी कि कृष्णा सर और माही के मध्य कोई और भी रिश्ता है। हां यह सच है कि दोनों शादीशुदा थे किंतु दोनों के मध्य कोई प्रबल आकर्षण बल था जो दोनों के बिना रिश्ते को इन दोनों की खुशी की वजह बना रहा था। यह प्रबल आकर्षण बल शायद नृत्य ही था। अपने इस रिश्ते से खुश थे और यह खुशी दोनों के चेहरे पर दिखाई देती थी।

कृष्णा क्लासेस नहीं आता उस दिन माही भी नहीं आती थी। दोनों के संबंध से वहां के कुछ लोगों को बहुत परेशानी होने लगी उन्होंने कृष्णा की शिकायत संस्थापक से कर दी। कृष्णा को चेतावनी दी गई कि आप अपने प्रोफेशनल और पर्सनल रिश्ते को अलग अलग ही रखें। कृष्णा ने जो भी जवाब दिया होगा पता नहीं पर माही को सिखाना और उसके साथ क्लासेज के बाद प्रैक्टिस करना बंद नहीं किया।

गरबा महोत्सव का दिन आया जब हमें ग्राउंड पर गरबा करना था उस दिन माही और कृष्णा का तालमेल बहुत ही अच्छा था। कभी-कभी मुझे लगता है कि ऐसा होता है कि जो हमारी नजरों में परफेक्ट कपल है वह कभी भी युगल हो ही नहीं सकते, कहते हैं जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं तो वह जोड़ियां इस धरा पर आकर एक दूसरे के साथ खुश क्यों नहीं है।

इवेंट के आखिरी दिन पर इन दोनों को बेस्ट कपल का प्राइस भी मिला। जब अगले साल हम गरबा सीखने क्लासेस गए तो माही तो हमें वही दिखी पर लोगों से पता चला कि कृष्णा ने यहां की क्लासेस छोड़ दी। कृष्णा सर अब इंदौर में ही सिखाते हैं। पिछले ही साल की बात है कृष्णा के पैर में चोट लगी हुई थी पर फिर भी वह दोनों गरबा कर रहे थे उनके आसपास के सभी लोग उनको देखकर कानाफूसी कर रहे थे पर दोनों को ही कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। कृष्णा और माही गरबा करने में ऐसे खोए थे कि जैसे मीरा श्रीकृष्ण की भक्ति में इतनी लीन हो जाती है कि गरल भी उसको प्रिय लगने लगता है और मेरे अनुसार तो जब आपको कोई कला जैसे संगीत, नृत्य , चित्रकारी आदि एक दूसरे से जो देती है तो लोगों के मध्य के संबंध सामान्य संबंधों से अधिक प्रगाढ़ हो जाते हैं।

ऐसी ही कला से जुड़ा हुआ संबंध है कृष्णा और माही का जो विरले ही देखने को मिलता है जिसमें तृष्णा, लालसा जैसी भावनाएं ना होकर केवल एक ऐसा संबंध है जो सांसारिक मोह और लोभ के रिश्ते से बहुत ऊपर है। हर साल कृष्णा माही के साथ गरबा खेलने इंदौर से भोपाल आता है। उनको मैं हर साल जब भी साथ में देखती हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है पर कुछ लोगों को कृष्णा और माही का यह रिश्ता गलत भी लगता है। इन लोगों के बारे में सोच कर कहीं पढ़ी हुई कुछ पंक्तियां यूं ही याद आ जाती है कि।

एक विवाह हीन प्रेम यदि पाप है तो एक प्रेम हीन दांपत्य कैसे पवित्र हुआ।


तारे हैं बाराती – Love Story in Hindi

अनुष्का अपनी सहेली आध्या से अपनी और अभिनव की फर्स्ट मुलाकात के बारे में बता रही थी।

अनुष्का- मुझे याद है जब अभी हम से पहली दफा मिले थे, एक शादी में। अभी बहुत देर से मुझे ही देख रहे थे, यह बात हमें हमारी एक बगल की बहन संस्कृति ने बताया कि दी वो लड़का कब से आपको देख रहा है। आप दोनों एक- दूसरे को जानते हो? तो हमने भी उसके कहने पर उधर देखा जिधर संस्कृति ने इशारा किया था। देखा कि सच में वह हमें ही देख रहे थे। हमने संस्कृति से बोला छोड़ो यार देखने दो।

देख नहीं रही हो तुम कितना बेशर्म लड़का है यह। देख रहा है कि हम उसे ही देख रहे हैं फिर भी वह हमारी तरफ ही देख रहा है और हम नहीं जानते हैं उस लड़के को। होगा लड़की वालों की तरफ से। संस्कृति थोड़ी चंचल है तो वह बिना हमें बताएं ही अभी के पास चली गई और उनसे बोली कि आप मेरी दी को क्यों देख रहे हो? क्या इरादा है आपका? तो अभी थोड़ा झेंप गए उसके ऐसे सवाल से, उनके मुंह से फ्लो- फ्लो मैं यह बात निकल गई कि वह मुझे पसंद करने लगे हैं।

संस्कृति भी कम नहीं थी। वह बोली कि अच्छा जी तो पसंद आई है मेरी दीदी आपको। तो यहां खड़े खड़े देखने से नहीं मिलने वाली है वह। जाओ और अपनी बात को आगे बढ़ाओ आप कहीं ऐसा ना हो जाए कि आप देखते रह जाओगे और कोई दूसरा मेरी जान से प्यारी दीदी को अपने साथ लेकर चला जाए।

संस्कृति की बात को सुनकर अभी को लगा कि कहीं सच में कोई और ना ले कर चला जाए। क्योंकि वह देख रहे थे कि बारात में जो लड़के आए थे वह सब भी मुझे ही देख रहे थे। कारण यह था कि उस शादी में सिर्फ हम ही एक बड़े थे बाकी छोटी-छोटी ही लड़कियां थी।

सच बताओ मुझे वह शादी बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थी। यार सब हमें ही घूर रहे थे। अब बताओ कोई तुम्हें यूं इस तरह एक टक अपलक निहारेगा तो आपको कैसा फील होगा उस समय मेरा तो मन कर रहा था उस समय की जाकर सबका मुंह तोड़ दूं। लेकिन अफसोस कि हम ऐसा नहीं कर सकते थे। क्योंकि घर आये मेहमान भगवान समान होते हैं ना।

सहेली आध्या ने कहा तो फिर क्या हुआ कैसे मिले तुम दोनों।

अनुष्का- अच्छा जी बड़ी जल्दी है जानने को फिर बताना शुरु करती है। तो क्या था संस्कृति के ऐसे कहने पर वह मेरे पास आए और आते ही धीरे से मुझे हेलो बोले और तब हमने भी हाय बोला।

कुछ देर तक यूं ही हम खामोश रहे। फिर जब मैंने देखा कि वह कुछ कहना चाह रहे हैं लेकिन कह नहीं पा रहे हैं और संस्कृति और अभिनव के बीच जो भी बातें हुई थी वह मैं नहीं जानती थी।

तो मैंने उनसे पूछा कि आपको कुछ कहना है क्या मुझसे। तो वह हां… हां….. नहीं… नहीं.. मेरा मतलब हां हमें आपसे कुछ कहना है यदि आप बुरा ना माने तो। हमने भी कहा कि नहीं कोई नहीं जो कहना है आप कह सकते हो तब वह थोड़ा सामान्य हो गए और मुझसे कहे कि यहां बहुत शोर है छत पर चल सकती हो प्लीज…

हम ने भी सोचा कहीं कोई जरूरी बात करनी होगी इस बंदे को, तो हम भी बोले जरूर चलिए लेकिन ज्यादा देर तक नहीं जो भी बोलना है वह जल्दी- जल्दी बोल दीजिएगा ठीक है। तो अभी भी हां में सिर हिला दिए।

जब हम दोनों छत पर गए तो वह मेरे कहे अनुसार हम जैसे ही छत पर पहुंचे वह बोलना शुरू किए। एकदम गंभीर आवाज के साथ और चेहरे पर नहीं ना सुनना पड़े इसकी वजह से घबराहट भी थी।

वह मुझसे बोले कि क्या आप मुझसे शादी करोगी यह बात है बहुत जल्दी से छत पर जाते ही पूछे थे। मैं आपको पसंद करने लगा हूं, क्या आप मुझसे शादी करोगी? मैं आपको दुनिया की हर खुशी देने की कोशिश करूंगा, आपकी इज्जत करुंगा, आपको बहुत प्यार से रखूंगा प्लीज मान जाइए ना। ना मत कहिएगा।

उनके अचानक से ऐसे कहने पर हम चौक गए। यार यह बंदा तो मेरा आशिक निकला। हम सोचने लगे इसे हम क्या कहें समझ नहीं आ रहा है और ऊपर से इसने कैसे बेचारा सा मुंह बना रखा है। यार भगवान जी आप ही कुछ करो हम क्या करें और क्या कहें इस बंदे को। हम तो ठीक से जानते भी नहीं हैं।

अभी ने जब देखा कि हम चुप हैं कोई जवाब नहीं दिए। तो वह उदास होकर बोला आप प्लीज मान जाइए ना। हां कहोगी तो हम अपने मम्मी- पापा से कहेंगे आपसे शादी करने को।

तब वह घुटनों के बल बैठ गए और अपना एक हाथ मेरी तरफ बढ़ा कर बोले क्या आप मुझसे शादी करेंगे। तब हम क्या करते यार बंदा क्यूट था। तो हमने भी उसके हाथ में अपना हाथ रख दिया और बोल दिया हां मैं शादी करूंगी आपसे।

वह बहुत खुश हो गए थे और मुझे अपनी गोद में उठा कर दो या तीन चक्कर गोल- गोल घुमा दिए थे। और फिर वही छत पर बैठ गए हम दोनों और बातें करने लगे। कुछ देर बात करने के बाद वह मुझसे बोले कि क्या आप हमसे अभी शादी करोगी तो हम बोले अच्छा बिना बारात लाए ही शादी करोगे आप मुझसे। बड़ी जल्दी है आपको तो।
तो उन्होंने बड़े ही शायराना अंदाज में कहा था।

ये तारे हैं बाराती
ये सैयारे हैं गवाह
चांद है मेरा दोस्त
और आप हो मेरे यार

हम तो उनके ऐसे कहने पर एकदम से शर्मा गए थे। फिर कुछ दिन बाद हमारी शादी भी हो गई और हम बहुत खुश भी हैं अपनी शादीशुदा जिंदगी में।

अनुष्का और अभिनव की लव स्टोरी सुनकर आध्या ने कहा वाह वाह क्या बात है। काश ऐसा हमारे साथ भी हो जाता। आप ही के जैसे हमारे भी हमसफर मिल जाते।

Love Quotes For Him in Hindi 2021


 ये प्यार नहीं आसां – Love Story in Hindi

यह कहानी शुरू हुई थी करीब 5 साल पहले ………..

बात उन दिनों की है जब हर्ष, स्कूल में पढ़ रहा था। पढ़ने में तेज था। गांव में स्कूल सेकेंडरी तक ही था तो 11वीं में दाखिला पास के कस्बे में ले लिया था स्कूल गया था। लेकिन अपने मिलनसार स्वभाव के चलते सबसे जल्दी ही घुल मिल गया था। 11वीं में अलग-अलग संकाय होने के बावजूद मैथ की क्लास कॉमन होती थी। कामन क्लास से हर्ष की कहानी ने नया मोड़ लिया था।

अब तक सब कुछ सामान्य चल रहा था। 1 दिन मैथ की क्लास खत्म होने के बाद एक लड़की हर्ष के पास आई।

मैंने 1 हफ्ते से क्लासेस नहीं ली है, मैं छुट्टी पर थी। मेरा सिलेबस कवर करवा दोगे प्लीज? उसने कहा।

हर्ष ने उसे पलट कर देखा, मासूम सा चेहरा, नाम था अनीशा।

कभी अपनी क्लास में नहीं देखा उसे, शायद आर्ट्स में थी।

हां क्यों नहीं, आइए। हर्ष ने कहा। दोनों ने पढ़ाई शुरू कर दिया और इतने में घंटी बज गई। बाकी कल कर लेंगे अनीशा ने कहा। ठीक है हर्ष बोला।

दूसरे दिन दोनों जल्दी ही साथ बैठ गए। हर्ष उसे मैथ पढ़ा रहा था और बीच-बीच में नजर उठा कर उसे देख भी रहा था। हर्ष लड़कियों के मामले में ऐसा नहीं करता पर इसमें कुछ बात थी जो हर्ष का ध्यान खींच रही थी।

3 दिन में सिलेबस कवर हो गया। दोनों अपनी क्लास में बैठे हैं उसकी नजरें पूरी क्लास में दौड़ कर उस पर आकर रुक जाती।

दोनों ही नजर झुका लेते। रोज उसे निहारना अच्छा लगने लगा था। पता नहीं क्या था पर नजरें उसे ही ढूंढती रहती थी। स्कूल से घर आना जाना बस से होता था, मेरे गांव की दूरी यही कोई 3 से 4 किलोमीटर तक होगी। पहले करीब 7:00 बजे सुबह मेरे गांव आती और यही कोई 10 मिनट से पहले उसके गांव पहुंच जाया करती थी। मुझे इंतजार रहता तो बस उसके बस में चढ़ने का। उसके गांव के बस स्टॉप पर बस के ठीक पहले मेरी नजरें बस की खिड़की से बाहर उसे खोज रही होती थी।

बस कुछ यूं ही उसको हंसते खिलखिलाते मेरी नजरें उसके गांव के बस स्टाप पर उसको दूर से ही ढूंढ लेती थी और स्कूल बस को देखकर वह अपनी सहेलियों के साथ अपना स्कूल बैग उठा कर कंधे पर टांग लेती थी। वह बस के रुकने पर बस के आगे के दरवाजे से अंदर आ जाती। वह नहीं आती थी उस दिन तो पूरा दिन उदासी में ही गुजरता था।

स्कूल से छुट्टी होती थी तो फिर से उसी पल का इंतजार करता। मुझे यह अनीशा बहुत गहरे, गहरी और गहरे 0 में ले गई थी। और यह शुन्य और भी गहरा होता जा रहा था।

मिलती हुई नजरों के सिलसिले में उन दोनों के बीच काफी कुछ बदल रहा था। दोनों के बीच में कुछ नहीं था फिर भी एक अनकहा रिश्ता पनप रहा था। एक दूसरे को देखना, बस में इंतजार करना आदत सी बन गई थी। अब बस देरी थी इस अनकहे रिश्ते को एक नाम देने की। और आखिरकार वह समय आया जब यह रिश्ता मुकम्मल हुआ।

उस दिन हर्ष हर रोज की तरह बस स्टैंड पर बस और अपने नैनो के नूर का इंतजार कर रहा था। सर्दियों का दिन था। घने कोहरे की सफेद चादर ने सब कुछ अपने आगोश में ले रखा था। ज्यादा लोग नहीं थे वहां पर आज। कुछ देर में अनीषा आ गई। वह हर्ष से थोड़ा सा दूर खड़ी हो गई और दोनों एक-दूसरे से नजरें मिलाने चुराने लगे। तभी बस आ गई। बस में ज्यादा भीड़ नहीं थी। उस दिन दोनों एक ही सीट पर बैठे। दोनों के बीच में चुप्पी छाई रही।

कैसी हो हर्ष ने शुरुआत करते हुए चुप्पी तोड़ी।

मैं ठीक हूं और आप अनीषा ने जवाब दिया।

मैं भी अच्छा हूं हर्ष ने जवाब दिया खामोशी छा गई। पहली बार इस तरह बातचीत में दोनों असहज हो रहे थे तभी अनीशा ने अपना हाथ आगे खिसकाया और हर्ष के हाथ को पकड़ लिया।

जो बातें लफ्ज कब से बयां नहीं कर पा रहे थे हाथो का स्पर्श बेलफ़्ज़ सब बयां कर रहा था। भावनाएं समझने के लिए शब्द जरूरी ही नहीं होते। बातें जो दोनों कहना थे सब बयां हो गई।

दोनों के मन में असीमानंद उमड़ रहा था। यह एक अलग एहसास था। सब कुछ इतना अच्छा लग रहा था। यह खुशी और उत्सुकता बयां नहीं की जा सकती बस महसूस की जा सकती है। पहले प्यार की खुशी।

जब प्यार बढ़ने लगा तो यह समय कम लगने लगा। दोनों को घर पर जाकर बात करने की जरूरत महसूस होने लगी। लेकिन यहां अभी भी 90 वाली कहानी चल रही थी।

अनीशा को घर वाले उसे फोन देना जरूरी नहीं समझते थे। तो अब बात कैसे हो। लेकिन जब जरूरत हो तो रास्ता निकल ही जाता है। और आखिर में घर पर रखे मोबाइल से मैसेज करने का जोखिम उठा लिया गया। अब रोज रात को जब घर वालों सो जाते तब चुपके से फोन उठा लिया जाता और फिर शुरू होती थी बिना शब्दों वाली बातें। बिना शब्दों वाली इसलिए क्योंकि घर वालों को पता ना चल जाए इस सांसों की आवाज में ही बातचीत होती थी। कभी कोई घर वाला उठ गया तो सोने का ऐसा नाटक होता था जैसे कब से सोए हैं और 3 सपने देख चुके हैं।

और इस तरह रोज बस में मुलाकात और रात में फोन पर बातें करते हुए कब वक्त ने साल पूरा कर लिया पता ही नहीं चला। स्कूल पूरा हो गया। अब दोनों को कॉलेज में एडमिशन लेना था। यह समय था दोनों के जुड़ा होने का। लम्बे समय से चली आ रही मधु मुलाकातों का दौर अब खत्म होने वाला था।

अनीशा के घर वालों ने उसका एडमिशन गर्ल्स कॉलेज में करा दिया और हर्ष को अपना एडमिशन पास के शहर में कराना पड़ा और वहीं पर किराए के कमरे में रहने लगा। रोज एक दूसरे से नहीं मिल पाते थे बस फोन पर बात होती थी। लेकिन जब इश्क का जुनून हो तो रास्ता निकल ही जाता है।

बहुत जुदाई के बाद अब मिलना जरूरी हो गया था। आखिरकार इस लंबी जुदाई का अंत हुआ। आज छुट्टी थी। रोज की तरह कंप्यूटर क्लासेस के लिए बस में बैठ गई। बस कंप्यूटर सेंटर को पार कर चुकी थी लेकिन अनीशा अभी भी बस में बैठी थी। आज उसे क्लास में नहीं कहीं और जाना था। वह अपनी क्लास और घर वालों का डर छोड़ कर शहर पहुंच गई।

जहां हर्ष पहले से उसका इंतजार कर रहा था,।हर्ष ने उसे बाइक पर बैठा लिया और कमरे की तरफ चल दिया। दोनों एक लंबे समय के बाद मिल कर बेहद खुश हो रहे थे। थोड़ी देर बाद दोनों रूम पर पहुंच गई। एक लंबे अरसे के बाद फिर से दोनों एक दूसरे के साथ थे। तमाम मुश्किलों के बावजूद मिल गए थे। यह सही है या गलत यह निर्णय करना बेमानी है। इश्क सही गलत देखकर नहीं होता, बस हो जाता है। दिल और दिमाग दोनों अलग होते हैं। दिल तो करता है जो खुद को अच्छा लगे और दिमाग वो जो औरों को अच्छा लगे। कभी-कभी वह भी करना चाहिए जो खुद को अच्छा लगे। वैसे भी हम समाज के लिए हमेशा अपनी खुशियां मार कर जीते हैं।

Love Quotes in Hindi for Husband 2021


मिल गया सच्चा प्यार – Love Story in Hindi

 

रवि को चौदह साल की उम्र में ही प्यार हो गया था। रवि उस समय दसवीं क्लास में था, उम्र कम थी लेकिन मॉडर्न जमाने में लोग इसी उम्र में प्यार कर बैठते हैं।

रवि का यह पहला प्यार उसकी क्लास में पढ़ने वाली लड़की माधवी के साथ था। माधुरी अमीर घराने की लड़की थी, उम्र यही कोई तेरह-चौदह साल की होगी और दिखने में बला की खूबसूरत थी। माधवी के पापा का बिजनेस का काम था, अच्छे पैसे वाले लोग थे।

रवि मन ही मन माधवी को दिल दे बैठा था। लेकिन हमेशा कहने से डरता था। रवि के पिता एक स्कूल में अध्यापक थे।उनका परिवार भी सामान्य ही था। इसलिए डर से रवि कभी प्यार का इजहार नहीं करता था।

चलो इस प्यार के बहाने ही सही लेकिन रवि की एक गंदी आदत सुधर गई। रवि आए दिन स्कूल ना जाने के लिए नए नए बहाने बनाता था। लेकिन आजकल टाइम से तैयार होकर चुपचाप स्कूल चला जाता था। मां-बाप सोचते बच्चा सुधर गया है लेकिन बेटे का दिल तो कहीं और ही अटक चुका था।

ऐसे ही समय बीतता गया लेकिन रवि को प्यार का इजहार करने की हिम्मत नहीं हुई बस चोरी-छिपे ही माधवी को देखा करता था। हां कभी-कभी उन दोनों में बात भी होती थी लेकिन पढाई के टॉपिक पर ही। रवि कभी अपने दिल की बात कह ही नहीं पाया। समय गुजरा दसवीं पास की, ग्यारहवीं पास की , अब बारहवीं पास कर चुके थे लेकिन चाहत अभी भी दिल में दबी थी।

आज स्कूल का अंतिम दिन था रवि मन ही मन उदास था कि शायद अब रवि कभी नहीं माधवी को देख पाएगा। क्योंकि रवि के पिता की इच्छा थी कि बारहवीं के बाद बेटे को बड़े शहर में पढ़ने भेजें। स्कूल के अंतिम दिन सारे दोस्त एक दूसरे से प्यार से गले मिल रहे थे, अपनी यादें शेयर कर रहे थे। माधवी भी अपने फ्रेंड्स के साथ काफी खुश थी आज… सब इंजॉय कर रहे थे,, अंतिम दिन लेकिन रवि की आंखों में आंसू थे।

रवि चुपचाप क्लास में गया और माधवी के बैग से उसका स्कूल का आईडेंटिटी कार्ड निकाल लाया। कार्ड पर माधवी की प्यारी सी फोटो थी। रवि ने सोचा कि इस फोटो को देखकर ही मैं अपने प्यार को याद किया करूंगा। रवि के पिता जी ने रवि को बाहर पढ़ने भेज दिया। माधवी के पिता ने भी किसी दूसरे शहर में बड़ा मकान बनवा लिया और वहां शिफ्ट हो गए। रवि अब हमेशा के लिए माधवी से जुदा हो चुका था।

समय अपनी रफ्तार से बीतता गया,, रवि ने अपनी पढ़ाई पूरी की और अब एक बड़ी कंपनी में नौकरी भी करने लगा था, अच्छी तनख्वाह भी थी लेकिन जिंदगी में एक कमी हमेशा खलती थी वह कमी थी माधवी की । बहुत कोशिशों के बाद भी रवि माधवी से कभी नहीं मिल पाया था।

घर वालों ने रवि की शादी एक सुंदर लड़की से कर दी और संयोग से उस लड़की का नाम भी माधवी ही था। रवि जब भी अपनी पत्नी को माधवी नाम से पुकारता उसके दिल की धड़कन तेज हो जाती थी। रवि के आगे बचपन की तस्वीरें उधर आया करती थी। पत्नी को उसने कभी इस बात का एहसास ना होने दिया था लेकिन आज भी वह माधुरी से सच्चा प्यार करता था।

एक दिन रवि कुछ फाइल्स तलाश कर रहा था कि अचानक उसे माधवी का वह बचपन का आइडेंटी कार्ड मिल गया। उस पर छपे माधवी के प्यारे से चेहरे को देखकर रवि भावुक हो उठा कि तभी पत्नी अंदर आ गई और उसने भी वह फोटो देख ली।

पत्नी- यह कौन है? जरा इसकी फोटो मुझे दिखाओ।

रवि- अरे कुछ नहीं, यह ऐसे ही बचपन में दोस्त थी।

पत्नी- अरे यह तो मेरी ही फोटो है, यह मेरा बचपन का फोटो है,, देखो यह लिखा है सरस्वती कान्वेंट स्कूल यही तो पढ़ती थी मैं।

रवी यह सुनकर खुशी से पागल सा हो गया- क्या यह तुम्हारी फोटो है? मैं इस लड़की से बचपन से बहुत प्यार करता हूं। माधुरी ने अब रवि को अपनी पर्सनल डायरी दिखाइ जहां माधवी की कई बचपन की फोटो लगी थी। रवि की पत्नी वास्तव में वही माधवी थी जिसे वह बचपन से प्यार करता था।

माधुरी ने रवि के आंसू पोछे और प्यार से उसे गले लगा लिया क्योंकि वह आज से नहीं बल्कि बचपन से ही उसका चाहने वाला था।

रवि बार-बार भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा था।

दोस्तों वो कहते हैं ना कि प्यार अगर सच्चा हो तो रंग लाता ही है। ठीक वही हुआ रवि और माधवी के साथ भी। रवि को आखिर में उसका सच्चा प्यार मिल ही गया।

20 Love Quotes For Her in Hindi


एकतरफा सच्चा प्यार- Love Story in Hindi

यह कहानी है भारत के शहर कसौली की; ये कहानी है राहुल और संजना की राहुल जो कि बारहवीं क्लास में था। सुबह के 7:00 बजे थे राहुल अपने रूम में सो रहा था। उसे क्या पता था कि आज से उसकी जिंदगी ही बदलने वाली है। इतने में एक आवाज आती है उठ जा राहुल सुबह के 7:00 बजे हैं। तेरी कोचिंग का पहला दिन है और तू अभी भी सो रहा है कहते हुए राहुल की मां उसके कमरे में आती हैं।

राहुल जो की बेखबर होकर सो रहा था उसे क्या पता था कि आज उसकी जिंदगी ही बदल जाएगी। राहुल की आंखें जैसे ही खुलती है उसकी नजर सामने दीवार पर टंगी घड़ी पर जाती है। अरे नहीं मैं लेट हो गया कहते हुए राहुल वॉशरूम की तरफ भागता है। और जल्दी से फ्रेश होकर अपना बैग लेकर कोचिंग को जाता है। जो कि उसके घर से कुछ ही दूरी पर थी। अरे राहुल आज पहले ही दिन लेट हो गए।

जाओ और संजना के पास उस सीट पर बैठ जाओ। संजना राहुल का छूटा हुआ काम पूरा करा देना। उसके सर कहते हैं, ये संजना और राहुल की पहली मुलाकात थी। संजना को देखते हुए उसे प्यार हो गया। उस दिन तो उनके बीच कोई ज्यादा बात नहीं हुई पर राहुल की जिंदगी बदल चुकी थी। वह सपने देखने लगा था। राहुल रोज कोचिंग जाता और पूरे टाइम बस संजना को देखते रहता। जो कि थोड़ी उदास रहती थी राहुल संजना की बातो को समझता था।

इसलिए उनमें अच्छी दोस्ती हो गई थी। संजना जो कि अपनी फैमिली की वजह से परेशान रहती थी। उसकी फैमिली के साथ संजना के रिश्ते अच्छे नहीं थे। संजना रोज उदास होकर कोचिंग आती है और राहुल उसे हंसाने की कोशिश करता रहता और कुछ देर चुप रहने के बाद संजना राहुल के जोक्स पर खुद को हंसने से रोक नहीं पाती थी। संजना आती तो उदास थी पर जाती हंसते हुए। राहुल संजना से हमेशा एक बात कहता था। तुम जब भी उदास हो ना बस मुझे याद कर लेना मैं हवा बनकर तुम्हारे पास आ जाऊंगा और तुम्हें हंसा दूंगा।

तीन महीने हो चुके थे राहुल का प्यार परवान चढ़ चुका था। राहुल को संजना से इतना प्यार हो गया था कि संजना के एक बार कहने पर वह अपनी सांसे भी रोक दें। पर आज भी उसका प्यार एक तरफा था राहुल को डर लगता कि जिस दिन संजना को पता चलेगा वह कहीं उससे गुस्सा ना हो जाए बात करना ना बंद कर दे। दोस्ती टूट जाने का डर कभी राहुल के दिल से नहीं गया।

उसी कोचिंग में एक और लड़का था आयुष जिसे राहुल की अच्छी दोस्ती हो गई थी। आयुष के बहुत कहने पर राहुल ने एक दिन सोच लिया कि वह संजना को सब कह देगा। आज दिवाली थी किसे पता था कि आज सब राहुल को आखिरी बार देख रहे हैं। सब एक दूसरे को विश कर रहे थे इतने में लोगों के पीछे से एक आवाज आती है राहुल हैप्पी दिवाली यार । यह संजना थी राहुल जो कि आज सोच कर आया था कि वह आज सब कह देगा।

राहुल संजना से कहता है कि तुम से मुझे कुछ जरूरी बात करनी है। आज राहुल का चेहरा मुरझाया हुआ था संजना को लगा कि राहुल मजाक कर रहा है। इस से पहले की संजना कुछ कह पाती राहुल उसका हाथ पकड़कर कोचिंग की छत पर ले जाता है। और संजना से उसकी आंखों को बंद करने के लिए कहता है।

संजना अपनी आंखें बंद कर लेती है और जैसे ही आंखें खोलती है तो देखती है कि राहुल अपने एक पैर पर उसे सामने गुलाब का फूल लिए बैठा है। संजना से कहता है मैंने तुम्हें उस दिन से चाहा है जिस दिन तुम्हें पहली बार देखा था मैं बहुत प्यार करता हूं। संजना यह सुनते ही रोने लगी उसे रोता हुआ देख राहुल ने उससे पूछा कि वह रो क्यों रही है। राहुल को बिल्कुल नहीं पता था कि संजना उससे क्या कहने वाली है।

संजना कुछ देर चुप रहने के बाद बोलती है और कहती है राहुल मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती हूं इसका मतलब यह नहीं कि मैं तुमसे प्यार करूं। मैं किसी और से प्यार करती हूं मानो कुछ समय के लिए सब कुछ रुक सा गया हो राहुल के सारे सपने टूट चुके थे।

उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। राहुल अंदर ही अंदर टूट गया था। आज उसकी जिंदगी उससे दूर हो रही थी। उसके प्यार को किसी की नजर लग गई हो वह संजना और राहुल की आखिरी मुलाकात थी।

हर किसी को अपनी जिंदगी में एक बार सच्चा प्यार होता है और कहते हैं कि सच्चा प्यार बहुत किस्मत से मिलता है। उसका दिल उसके सपने जो उसने संजना के साथ देखे थे सब बिखर चुके थे। राहुल उस दिन के बाद कभी उस कोचिंग में नहीं आया। संजना आज भी उसी कोचिंग में पढ़ती है और उसे हँसाने वाला वहां कोई नहीं है। हमारी जिंदगी में किसी ऐसे का होना बहुत जरूरी है जो हमारी आवाज से हमारी खुशियां दुख का अंदाजा लगा सके।

प्यार के रास्ते कोई अनजान क्या जाने।
इश्क किसे कहते हैं कोई नादान क्या जाने।।
उड़ाकर साथ ले गए घर परिंदों का।
कैसे बनें ये घोसले ये तूफान क्या जाने।। 

अधूरा प्यार ‘Best Heart Touching Love Story’


प्रेम का सौंदर्य -Love Story in Hindi

सूर्य की किरणें जैसे ही पृथ्वी पर पहुंची सभी जीव जंतु अपने रोजमर्रा के कार्य में व्यस्त हो जा रहे थे। ठंडी हवा का झोंका पत्तों को छूकर गुजरता हुआ फूलों की खुशबू को साथ में उड़ाता हुआ पूरे माहौल को खुशनुमा बना रहा था। इतनी प्यारी सुबह इठलाती हुई, सभी के जीवन में मानो प्राण फूंक रही हो……

एक प्यारी सी तितली बहुत ही खूबसूरत मानो उसकी आंखें कंचे की तरह चमक रही हो ; उसके पर तो फूलों से ज्यादा कोमल थे वह उड़ती हुई एक पौधे की नव कली में जा बैठी, उस अपने घर शहद से भरी प्याली जो ले जानी थी। वह मधु पान में डूबी हुई थी तभी अचानक एक कर…. कर… कर…. की आवाज उसे परेशान करने लगी, वह जैसे ही अपना ध्यान हटाकर देखी तो एक काला सा बदसूरत कीट पत्तों को चबा चबा कर खा रहा था।

तभी तितली ने कहा- बदसूरत कीट क्या तुम अपना खाना बंद नहीं कर देते? तुम्हारी कर कर से मुझे बहुत परेशानी हो रही है। कीट ने कहा- मुझे माफ कीजिए खूबसूरत सी प्यारी तितली मैं यहां से चला जाता हूं, फिर वहां रेंगता हुआ धीरे-धीरे दूसरे पत्ते पर जा बैठा। तभी वहां बैठा एक भंवरा, तितली से बोला- तुम तो बहुत प्यारी और खूबसूरत हो उस जमीन पर रहने वाले कीट की भला क्या औकात जो तुम्हारे पास भी आ सके या तुमसे दोस्ती कर सके।

तितली भवरे की बात सुनकर अपनी खूबसूरती इठलाने लगी।

रोज कीट उसे दूर से देखता तितली कीट को देख मुंह मोड़ लेती। भंवरा और तितली अच्छे मित्र बन चुके थे। समय बीतता गया इस बीच काफी दिनों से कीट नजर नहीं आया, तितली ने भंवरे से कहा लगता है वह बदसूरत सा कीट मर गया होगा यह सुनकर दोनों हंसने लगे। भंवरे ने कहा- सही बात है वह तो धरती पर बोझ था अच्छा हुआ वह मर गया। मुझे बदसूरत लोग पसंद नहीं। हां हां ही ही… अब जरा मुझे देखो मैं जवान हूं बहुत बलशाली हूं। ज्यादा मधु इकट्ठा कर सकता हूं, फिर तितली ने भी हामी भरी सही कहा मित्र हां हूं हां।

अभी वह साथ में बैठे बातें ही कर रहे थे कि तभी अचानक तेज हवा का झोंका आया इतना तेज की कोई संभल ही नहीं सका तितली अपनी खूबसूरत पंखों को संभालने की कोशिश करती रही पर अंततः हवा के बहाव के कारण वह एक झाड़ी में जा गिरी, भवरा फूलों के बीच जाकर छुप गया। कुछ समय बाद तितली ने खुद को संभाला। अरे यह क्या उसके खूबसूरत कोमल पंख अब फट चुके थे।

अब वह उड़ नहीं सकती थी और ना ही वह खूबसूरत दिख रही थी। मानो की बस उसकी जान बच गई हो तभी भंवरा उड़ता हुआ तितली के पास आया। अरे यह क्या हुआ तुमको। तुम तो इतनी बदसूरत हो गई हो कि को देखे तक नहीं। और अब तो तुम्हारे पास तुम्हारे कोमल पंख भी नहीं रहे। माफ करना तितली रानी अब हम दोस्त नहीं रहे मैं जा रहा हूं। तितली ने कहा- रुक जाओ बलशाली भंवरे अगर तुम चले जाओगे तो मैं अकेली हो जाऊंगी कौन बात करेगा? मुझसे अब मेरी तारीफ कौन करेगा? पर भंवरे को काफी जल्दी थी वह उड़ गया।

तितली झाड़ी में बैठे बैठे खुद की आकृति पानी में देखकर दुखी होने लगी तथा अपने द्वारा किए गए गलत व्यवहार के लिए शर्मिंदा होने लगी उसे समझ आ गया था कि वह खूबसूरत नहीं रही। देखते ही देखते अब रात हो गई उसे डर लगने लगा वह उड़ कर अपने घर वापस नहीं जा सकती थी, वह पत्तियों के बीच में जाकर छुप गई। अगली सुबह जब उसने आंखें खोली तो उसने देखा कि उसके सामने दो पतीले शहद से भरे रखे थे और यह क्या सामने कौन है?

कितना नौजवान, रंग बिरंगे पंख वाला एक पतंगा। वह कुछ समय तो उसे देखती रही पतंगा भी उसे ही देख रहा था मानो समय रुक गया हो फिर थोड़ी मायूस होकर तितली ने पतंगे से पूछा तुम कौन हो? और मेरी मदद क्यों कर रहे हो? तुम बहुत ही आकर्षक हो मैं तुम्हारे लायक नहीं हूं। तुम जाओ यहां से कृपया कर मुझे अकेला ही छोड़ दो।

उसकी इन बातों को सुनकर पतंगा मुस्कुराया फिर गंभीर होकर उसने तितली की आंखों में देखा फिर कहा मुझे अवश्य ही जानती हो प्रिये पर पहचान नहीं रही क्योंकि मैं बदल गया हूं।

तितली ने कहा- मतलब?

पतंगा- मतलब कि मैं वही हूं प्रिय जो तुम्हें बहुत ही बदसूरत लगता था। यह सुनकर तो तितली के आश्चर्य की सीमा न रही ।

तितली ने कहा- मुझे माफ़ कर दो नौजवान पतंगे मैंने हमेशा अपनी खूबसूरती के घमंड में चूर होकर तुमसे कभी अच्छा व्यवहार नहीं किया और ना ही तुमसे कभी मित्रता की।

फिर पतंगे ने गहरी सांस भरी और कहा- मैं तुमसे प्रेम करता हूं प्रिये । क्या तुम भी मुझसे प्रेम करोगी? क्या तुम मेरी मित्र बनोगी?

पतंगे ने फिर कहा तुम मेरा प्रेम हो प्रिये मैं तुम्हें प्रतिदिन देखने के लिए पति के बीच जाकर बैठ जाता था और हरी हरी तथा मीठी-मीठी पत्तियां खाता था। इस प्रकार दिन पर दिन में बड़ा होता गया और जल्द ही वह समय भी आया जब मैं तुम्हें देख नहीं सकता था क्योंकि मैं कोकून में बंद था और काफी दिनों बाद जब मैं बाहर आया तो मैं एक आकर्षक पतंगा बन गया हूं।

यदि मुझे कभी तुमसे प्रेम ना हुआ होता तो मैं कभी भी उस पौधे की डाली पर नहीं बैठता और ना ही मीठी मीठी पत्तिया खाकर मैं एक नव जवान पतंगा बनता। तुम्हारे आने और जाने से मुझ में जो सकारात्मक हुआ है। इन सब की वजह तुम ही हो प्रिय यदि मेरी जिंदगी में तुम ना होती तो यह परिवर्तन शायद ही होता। शायद ही मैं उस पौधे पर रोज जाकर बैठता।

यह सुनकर तितली मुस्कुराई क्योंकि उसे पता चल गया था कि सच्ची मित्रता में भौतिक आकर्षण हो यह जरूरी नहीं होता। प्रेम में साथ निभाना होता है जो उस पतंगे ने किया। पतंगा मन से भी खूबसूरत था उसके मन की खूबसूरती को देख तितली को उस पतंगे से सच में प्यार हो गया। दोनों एक दूसरे की तरफ प्रेम भाव से देखने लगे और शाम हो गई।


ऐ प्यार तेरी पहली नज़र को सलाम -Love Story in Hindi

 

पहला प्यार….. पहले प्यार का एहसास, शायद पहली बारिश की उन दोनों की तरह होता है जो जलती और सूखी धरती को अपनी शीतलता से भिगो देती हैं….. भीनी महक सा भीना और मीठा एहसास…… एक कसक कि अब बादल बरसेगा….. अब बिजली चमकेगी…. अब आसमान से बूँदे तन मन को भिगो देंगी……. चारों तरफ सिर्फ हरियाली और ऐसे में पूरी कायनात बेहद खूबसूरत नजर आने लगती है।

मैं नहीं जानती वह पहला प्यार था….. महज आकर्सण या कुछ भी नहीं, लेकिन उस एहसास के बाद आज तक कोई उस शिद्दत से मेरी रूह को उस तरह भिगो ही नहीं पाया। किसी ने सही कहा है कि, फीकी है हर चुनरी, फीका हर बंधेज, जो रंग दे इस रूह को, वो असली रंगरेज”।

उसने मुझ पर, मेरे मन पर या मेरी यादों पर जो रंग चढ़ाया, लगता नहीं मरते दम तक वो एहसास भूल भी पाऊंगी….. सालों बाद भी उसकी हूक दिल में उसी शिद्दत से आज भी बरकरार है।

मैंने प्यार के अहसास को पहली बार उसी से जाना समझा…. आशुतोष, यही वह नाम था, जिसको सुनते ही मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाया करती थी। मेरे पड़ोस में उसकी नानी का घर था, इसलिए वह अक्सर आता जाता या वही रहता था। शुरुआत में मुझे कभी समझ नहीं आया, कि आशुतोष की नजरें मुझे निहारती हैं कभी हमारा सामना होता, तो वह नजरें हटा लेता था।

धीरे धीरे उसकी नजरें ठहरने लगी, गाहे-बगाहे मुझे खोजने लगी और बिना आवाज या शब्दों के बहुत कुछ कहने लगी। वो मुझे अक्सर देखता खोजता, हमारे घर आता जाता, सबसे मिलनसार व्यवहार….. लेकिन कभी कोई गलत बात या इशारा नहीं किया।

मैं पूजा जो बहुत रूढ़िवादी परिवार में पली-बढ़ी, घर की बड़ी लड़की, जिस पर जमाने भर की जिम्मेदारी और उम्मीदों का बोझ , कड़े पहरे और हर एक सांस पर हजारों बंदिशे ….. कई बार मन करता, कि उससे बात करू … लेकिन घर में आने वाले तूफान से सहम जाती और घबरा कर दिल को समझा लेती।

वो सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं, व्यवहार और संस्कार में भी बहुत अच्छा… देखने में ऐसा, कि किसी का भी दिल आ जाए…. बस एक मैं थी , जिसने अपने दिल को पत्थर बना रखा था। दरअसल मैं अपने परिवार में जिस माहौल में रहती थी, वहां अपने लिए प्यार, अपनापन, संवेदना… सारे शब्द बेमानी थे, लेकिन उसकी कोशिश और कशिश ने पत्थर पर भी चोट कर ही दी।

एक दिन सुबह आशुतोष हमारे घर आए… उस वक्त मैं सबको नाश्ता परोस रही थी। मेरे बड़े भैया ने मुझसे कहा, कि आशुतोष के लिए भी नाश्ता परोस कर लाओ। मैंने जैसे ही नाश्ते की प्लेट उनकी और बढ़ाई तभी भैया ने मुझसे कहा, मैं अभी हाथ धोकर आता हूं।

तभी मौका पाकर आशुतोष ने मुझसे कहा,” पूजा मैं काफी समय से तुमसे कुछ कहना चाहता हूं। मैं तुम्हें बेहद पसंद करता हूं”। आशुतोष इतना ही कह पाए थे, कि अचानक भैया वापस आ गए और मैं वहां से उठकर अंदर रसोई में आ गई। तब एकाएक मेरे रोम रोम में सिहरन सी पैदा हो गई। मेरी आंखों के सामने अतीत की कई घटनाएं एक साथ तैर गई।

उस पल मुझे एहसास हुआ, कि क्यों मैं इस सच से दूर भाग रही थी। बाद में अकेले बैठकर एकांत जब मैंने विचार करना शुरू किया, तब धीरे-धीरे मुझे समझ में आया, कि आशुतोष मुझे चाहता है बेहद चाहता है और ना जाने कब से चाहता है? बचपन में उसके साथ खेलें, बड़े हुए लेकिन मैं कभी समझ ही नहीं पाई…. जब तक समझी और अपने आपको इस लायक बना पाती, कि उसका हाथ थामने परिवार का सामना कर सकूं, वह मुझसे दूर जा चुका था, बहुत दूर…. मेरा इंतजार करते-करते उसने अपनी दुनिया बसा ली ।

दरअसल अपनी आगे की पढ़ाई के सिलसिले में मुझे अपने छोटे से शहर जबलपुर से दिल्ली जैसे बड़े शहर में जाने का मौका मिला। मैं अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गई और अपने पैरों पर खड़े होने के सपने देखने लगी। इस दौरान पता ही नहीं चला कब तीन साल गुजर गए। मैं जब भी आशुतोष के बारे में सोचती है, मन करता कि एक बार अपने पैरों पर खड़ी हो जाऊं, फिर उनसे यह कहूंगी, वो मेरे घर अपने माता-पिता को रिश्ता लेकर भेज दें, मेरी तरफ से भी हां है लेकिन मेरा यह सपना चूर-चूर हो गया।

मुझे एक दिन फोन पर मां से पता चला, कि अगले हफ्ते आशुतोष की शादी है। उसके माता-पिता उसकी शादी का कार्ड देने घर आए थे। कह रहे थे, आशुतोष काफी समय से किसी को पसंद करता था, लेकिन लड़की का शायद मन नहीं था। लेकिन जब हमने आशुतोष के लिए एक अच्छा रिश्ता देखा तो काफी ना नुकर के बाद उसने हां कर दी, हमने भी शादी की तारीख तय करने में देर नहीं की। एक पल के लिए मुझे मां की इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ, कि आशुतोष किसी और के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।

पर अब भी मैं यह नहीं मानती, कि उसका वह प्यार या अपनापन झूठा था….. हो सकता है वह महज उम्र का आकर्षण हो मेरे लिए भी और उसके लिए भी, एक बात यह भी है कि आखिर कब तक कोई किसी का इंतजार करता, कि सामने वाला शख्स ना कुछ कह रहा है ना जता रहा है।

आशुतोष की आंखें बोलती थी……. उसका चेहरा बात करता था, लेकिन मैं मूक-बधिर बनकर सब कुछ अनदेखा करती….. बस इंतजार करती है, कि उसका दीदार हो जाए। जैसा किस्से कहानियों में हम सुनते हैं, अक्सर वह हर जगह महसूस होने लगता……….. बार बार आंखें किताबों से सरक कर या तो उसके चेहरे को ढूंढती है ख्वाबों में डूब जाती ।

आज वह मेरे साथ नहीं है लेकिन पहले प्यार का वह खूबसूरत एहसास मेरी आखरी सांस तक मेरे साथ रहेगा। उसके प्यार ने मुझे तोड़ा भी, लेकिन मजबूत बनना सिखाया…… उसे मैंने हमेशा के लिए खो दिया, लेकिन उसने मुझे पाना सिखाया। उसने मुझे सिखाया, की मैं जो भी बात हो, समय रहते बोल देना चाहिए। तब से मैंने मजबूती के साथ सबके सामने अपनी बात रखना सीखा। सबसे पहले उसने मुझे एहसास कराया, कि मुझ में ही कोई खूबी है और कोई मुझे भी प्यार कर सकता है।

वह जहां भी रहे, खुश रहे आबाद रहे। मैंने जो खोया, उसका गम नहीं है क्योंकि जो उस पहले प्यार ने एहसास दिया, वह जिंदगी में कम नहीं है। वह पहला शख्स जिसने मुझे जिंदगी में पहली बार अपना वजूद होने और उससे प्यार करने का खूबसूरत एहसास कराया… ए प्यार तेरी पहली नजर को सलाम।


 प्यार की एक कहानी ऐसी भी- Love Story in Hindi

अक्सर दिल टूटने के बाद इंसान एक जिंदा लाश बन जाता है। प्यार पर से उसका भरोसा ही उठ जाता है। फिर वह किसी पर दोबारा भरोसा नहीं कर पाता।

अंकित भी इन्हीं लोगों में से एक है, उसके लिए यह प्यार अब तो बस एक दिखावा है, ढोंग है पूरी दुनिया के सामने। मीना से प्यार में धोखा बाद अंकित ऐसा ही हो गया था । प्यार में धोखा मिलने के बाद अंकित के जीने की बस एक ही वजह थी, उसका वर्षों पुराना सपना एक बिजनेसमैन बनने का। अंकित भले ही श्रुति के साथ रिलेशन में था लेकिन वह कभी उससे प्यार ही नहीं कर पाया क्योंकि वह खुद को फिर से खोने से डरता था।

अंकित शुरु से ऐसा नहीं था। अंकित की प्यार के बारे में सोच भी ऐसी नहीं थी। अंकित मीना से बहुत प्यार करता था। अंकित की दुनिया मीना से शुरु होकर मीना पे ही ख़तम होती थी। पर मीना के लिए अंकित इतना मायने नहीं रखता था। मीना अंकित को धोखा दे रही थी। पर ये सच अंकित को पता नहीं था । पर एक दिन अचानक अंकित ने मीना को किसी और की बाहों में देख लिया।

उस दिन अंकित का दिल टूट गया। अंकित के दिल में तो जैसे जिंदिगी जीने की चाह ही ख़तम हो गयी। पर कहते है न दिल में चाहे हजारो गम हो पर अपनों के लिए मुस्कुराना ही पड़ता है। यही अंकित के साथ भी हुआ। अंकित को अपने परिवार के लिए ये करना पड़ा । पर अंकित का प्यार से भरोसा अब उठ चूका था। तभी कुछ समय बाद श्रुति अंकित की जिंदगी में आयी और फिर श्रुति ने अंकित की जिंदगी के मायने ही बदल दिए ।

श्रुति अच्छे से समझती थी, सिर्फ इसीलिए नहीं कि वह अंकित से बेहद प्यार करती थी, इसलिए भी क्योंकि उसने भी अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सहा है बहुत कुछ देखा है। श्रुति ने भी कभी वही धोखा खाया जो अंकित ने सहा था।

श्रुति अंकित को हमेशा समझाती कि अंकित हर लड़की एक जैसी नहीं होती और मैं सच में अलग हूं, मेरा विश्वास करो। लेकिन फिर से किसी के प्यार विश्वास करना ही अंकित के लिए सबसे मुश्किल था। बहुत दिनों तक अगर श्रुति और अंकित के बीच बाते न होती तो भी श्रुति अंकित से लड़ती नहीं थी, उल्टा उसको और मेहनत करने को बोलती, अपने सपने को हकीकत में बदलने को बोलती। जहां सब पैसों के पीछे भागते वहां श्रुति सिर्फ अंकित की अच्छाइयों के पीछे भागती। श्रुति हर तरह से अंकित को सपोर्ट करती , उसे मोटिवेट करती क्योंकि वह एक राइटर जो थी।

अब धीरे-धीरे श्रुति की मेहनत भी रंग लाने लगी थी। अंकित उसके प्यार को समझने लगा था कि उसी वक्त अंकित के हाथों से एक बड़ी डील निकल जाती है और बेचारी श्रुति पूरा दोष खुद को देती है। श्रुति सोचती है की उसका अस्तित्व अंकित को सिर्फ दर्द ही देगा। इसलिए वह अंकित से ब्रेकअप करने का सोचती है।

श्रुति अंकित से कहती है हमारा मिलना तो बस एक इत्तेफाक था पर जुदा होना हमारी किस्मत में ही लिखा था। अंकित को श्रुति का यह बदलाव समझ में नहीं आया, उसने श्रुति से पूछा कि ऐसा क्या हो गया जो तुम यह सब कह रही हो तो बदले में श्रुति ने कहा कि तुम यह सब छोड़ो और मन लगाकर काम करो और एक अच्छे बिजनेसमैन बनो।

यह कहकर श्रुति ने मुंह मोड़ लिया और हमेशा के लिए अंकित की जिंदगी से चली गई। अंकित ने यह सोच लिया कि वह अब जिंदगी में कभी किसी से प्यार नहीं करेगा। श्रुति के चले जाने के बाद ही अंकित को उसके प्यार का एहसास हुआ, लेकिन अब कोई फायदा नहीं, श्रुति को गए हुए दो महीने हो चुके थे। इसी दौरान अंकित कभी-कभी श्रुति को इंस्टाग्राम पर स्टॉक किया करता और समझाता की श्रुति उससे दूर जरूर है लेकिन वह हर पल उसको मोटिवेट करती है।

देखते ही देखते ना जाने कैसे दो साल बीत गए। अब अंकित एक फेमस बिजनेसमैन है और श्रुति एक फेमस राइटर। पर दोनों की जिंदगी में असली खुशी आना अभी बाकी था। अंकित अपने दोस्तों के साथ लंदन घूमने जा रहा था। एयरपोर्ट पर पहुंचते ही लाखों लोगों की भीड़ में एक चेहरे ने फिर से अंकित के चेहरे पर इतने दिनों बाद मुस्कान लाई।

अंकित उस इंसान के पास दौड कर गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर बहुत बोला श्रुति यह तुम ही हो ना। वह श्रुति ही थी। अचानक इतने दिनों बाद अंकित के गले की आवाज सुनकर श्रुति रोने लग गई और और मुड़कर अंकित को जोर से गले लगा लिया। अंकित ने श्रुति के आंसू पूछे और दोनों ने एक दूसरे से अपने अपने प्यार का इजहार भी किया।

लेकिन अंकित उससे अभी गुस्सा था तो श्रुति ने उसके गुस्से को तोड़ने के लिए सबके सामने ही अंकित के पर किस किया और अंकित शर्म से लाल हो गया।

यह सीन देखने लायक था वह दोनों फिर से एक दूसरे को अपनी जिंदगी में पाकर बहुत खुश थे।

अंकित और श्रुति ने एक साथ एक सेल्फी लिया और उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और कैप्शन दिया एक कहानी ऐसी भी।

ये तो होना ही था। जरुरी नहीं की जिंदगी में एक बार धोखा मिले तो पूरी जिंदगी आपको सिर्फ धोखा ही मिलता रहेगा। दुनिया में हर कोई एक जैसा नहीं होता । एक बार अगर भरोसा टूटा तो ये नहीं की बार बार भरोसा टूटेगा । इंसान वही है जो एक भरोसा टूटने के बाद भी भरोसा करना न छोड़े । क्योकि यही जिंदगी है ।


अनोखा प्यार अधूरा इश्क – Love Story in Hindi

 

यह कहानी शुरू होती है साल 2019 के अंत से 2020 के शुरुआती साल में जब मैं 11वीं क्लास में था। मैं इस कहानी को लिखते हुए खुद इमोशनल हो रहा हूं इस कहानी के बारे में आपको क्या बताऊं।

मैं 11वीं क्लास में था तो मैं हॉस्टल में रहता था। घर से दूर जब मैं पहली बार गया। मैं अपनी पढ़ाई के बारे में ध्यान दे रहा था। लगभग 5 महीने बीत गए रोज स्कूल जाता था और आता था। 1 दिन स्कूल गया तो मेरे सब दोस्तों ने झूठा ही मेरा जन्मदिन मनाया।

सारे दोस्त चॉकलेट लेकर आए थे। तो उन्होंने मुझे कहा कि ये चोकोलेट मै सब को बाँट दू पहले अद्यापको को बाद में जो भी क्लास में आता। उसके बाद लड़कियों को बॉटने मैं आगे गया।पहली लाइन में बांट रहा था। पहली लाइन की तीसरी लड़की को चॉकलेट दी तो और उसे एक नजर में देखा तो एक सुंदर सी लड़की सुशील नजर आई। और मैं उसे देखता ही रह गया।

मेरी झलक उसकी आंखों में पड़ गई जिसका नाम कुछ भी मान लो और मेरा हाथ वही थम गया। और मै वही पर रुक गया पता ही नहीं चला कि मैं कक्षा में हूं और अचानक अध्यापक ने कहा कि क्या हुआ बेटा चॉकलेट बांट क्यों नहीं रहे हो। मैंने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही।

मैं आगे गया पर मेरा दिल बार-बार कहता कि एक बार और एक बार और देखो। एक बार और देखो तो उस दिन मानता हूं कि मैंने गलती की कि मैं पढ़ाई को छोड़कर इस सब में फस गया। ऐसे ही मैं विद्यालय के बाद हॉस्टल जाता और जब भी किताब हाथ में लेता।

बस उसी की याद आती वह मुझे नहीं जानती थी ना मैं उसे जानता था। मैं वह मेरा नाम भी नहीं जानती थी और ना मैं उसका नाम जानता था। ऐसे ही चलता रहा तो मैंने सोचा कि उस पर कविताएं लिखी जाए बचपन से लिखने का बहुत बड़ा शौक रखता था।

मेरा भविष्य क्या है मेरी मां मेरे पापा पे मैं लिखता था तो मैंने उसके ऊपर कविताएं लिखी ऐसे ही दिन बीत गए मैं स्कूल जाता हूं और वह भी स्कूल आती। बस ऐसे ही चलता है। जब कभी भी छुट्टी होती तो मैं घर आने का नाम ही नहीं ले रहा था। तो घर वालों ने मुझसे पूछा तू घर क्यों नहीं आ रहा है क्या समस्या है। मैंने कहा कुछ नहीं कोई समस्या नहीं क्योंकि यह सब बताना मुश्किल होता है।

तो मैंने एक दिन सोचा की यह सब कितने दिन चलेगा।

ना मैं पढ़ाई पर ध्यान दे पा रहा हूं और वह अपनी मस्ती से पढ़ाई कर रही है। उसको कोई मतलब भी नहीं तो मैंने एक दिन उसको दोपहर के समय लंच के समय मैंने पूछा क्या नाम है तुम्हारा उसने कहा कि कौन हो तुम मेरा नाम पूछने वाले । मैंने कहा ऐसे ही समझ लो दोस्त हैं।

फिर उसने अपना नाम बताया फिर मैंने अपना परिचय दिया उसको। उसने कहा कि मैंने तुम्हारा परिचय पूछा ही नहीं। किसको दे रहे हो तुम अपना परिचय मै शरमा गया और मैं अपने स्थान पर बैठ गया।

दूसरे दिन मैं फिर गया मैंने उसको पूछा पढ़ाई कैसी चल रही है पढ़ाई के नाम पर मैंने जैसे तैसे उससे बात करने की कोशिश की तो उसे समझ आ गया कि लड़का मुझे छेड़ रहा है। फिर क्या क्लास में अध्यापक आई और उसने कहा कि यह लड़का मुझसे बातें करता है और यह मुझे छेड़ रहा है तो मैंने कहा मैं तो ऐसे ही बात करने की कोशिश कर रहा था।

उस दिन तो जैसे तैसे करके परेशानी से मुक्त हुआ। तो अध्यापक ने कहा फिर कभी बात की तो ठीक नहीं । पर मैं मानने वाला कहां था। मैंने तीसरे दिन वही मैंने उससे बात करने की कोशिश की पर उसने कहा कि शिकायत प्रधानाध्यापक से करूंगी तो मैंने कहा नहीं नहीं आगे से मैं तुमसे बात नहीं करूंगा। मैं बैठ गया। अगले दिन स्कूल गया तो अब क्या था अब उसे वहीं से बैठे-बैठे दूर से देखता रहता ।बस सारे दिन उसी को देखता देखता क्लास में कौन आ रहा है क्या पढ़ा रहा है उससे मुझे कोई लेना देना ही नहीं था बस ऐसे ही चलता गया।

मैं रोजाना एक नजरों से देखता रहता तो ने धीरे-धीरे उसने भी देखना शुरू किया। मुझे मतलब ऐसा लगता कि उसने मन में मेरे प्रति विचार प्रकट होने लगे तो 1 दिन उससे बात की तो मुझसे। तू मुझे रोजाना क्यों देखते हो मैंने कहा ऐसे है तो उसने कहा कि प्रकृति को देखना सब को अच्छा लगता है। तुझे मुझ को देखकर अच्छा क्यों लगता है।

मैंने कहा पता नहीं तुझे देख कर मुझे अच्छा लगता है इसलिए मैं देखता हूं। मैंने कहा चाहो तो शिकायत कर सकती हो आप अध्यापक जी को उसने कहा नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है। फिर उसने मुझसे पूछा कि तुम कहां रहते हो। तुम कौन से हॉस्टल में रहते हो तुम्हारे मम्मी पापा क्या करते हैं। तुम कितने भाई बहन हो तो मैंने मेरा परिचय दिया और जब उससे पूछा तो उसने भी अपना परिचय दिया।

धीरे-धीरे ऐसा ही चलता गया और वह कक्षा में आती पढ़ती और वापस अपने घर चली जाती। एक दूसरे को देखते और मुस्कुरा देते । ऐसा करते-करते ग्यारहवीं क्लास की परीक्षाएं आ गई। परीक्षा देने के बाद आपको पता है की छुट्टियां हो जाती हैं।

एक तो मैं आज उससे मिला ही नहीं और छुट्टियां हो गई मैं अपने घर आ गया हूं। वो अपने घर चली गई जैसे छुट्टियां समाप्त हुई और मैं 12वीं क्लास में वापस गया पढ़ने के लिए तो घर वालों ने मुझसे कहा कि हॉस्टल रहेगा तो मैंने कहा हां मैं हॉस्टल रहूंगा और हॉस्टल चला गया।

उस समय कोरोना बहुत ज्यादा था तो अध्यापक ने कहा शायद विद्यालय दोबारा बंद हो सकता है तो मुझे तो एक बहुत बड़ा समझो झटका लगा। मैंने कहा क्या बड़ी मुश्किल से दो या तीन महीनों के बाद विद्यालय खुला है और आते ही बोल रहे है की विद्यालय बंद हो सकता है। जैसे तैसे विद्यालय दो-तीन महीने तक चला।

दो-तीन महीनों में वह भी स्कूल आती है और मैं भी जाता तो उसने मुझसे पूछा 11वीं की छुट्टियों में क्या किया तो मैंने कहा कुछ नहीं । मैंने कहा कि तुमने क्या किया उसने मुझसे कहा 12वीं की तैयारी की मैंने तो नहीं की फिर क्या ऐसे ही हमारा चलता रहा फिर एक दिन मैंने बिंदास होकर एक बड़ा सा पेज लिखा। उस पर पूरी अपने दिल की बात लिख दी।

मैंने धीरे से उस खत को उसके बैग में डाल दिया उसने घर जाकर उस पेज को पढ़ा और दूसरे दिन उसने भी उतना ही बड़ा है एक पेज लाकर मुझे हाथ में दे दिया। मैंने तो बैग में डाला पर उसने हाथों में दिया मुझे। मैंने सोचा कि क्या पता इस पर क्या लिखा है।

जैसे छुट्टी हुई मैं हॉस्टल गया जाते ही उस पेज को बैग से बाहर निकाला और पढ़ना शुरू किया तो उस पर लिखा था मेरा नाम उसने अपना परिचय दिया पूरा और यह समझ कर दिल की बात लिखी। तुम भोले भाले इंसान हो अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो क्यों इन चीजों में फंस रहे हो। ऐसा कुछ बहुत जो उस पेज पर लिखा हुआ था। मैंने पूरा पढ़ा और लास्ट में उसने लिखा था कि अब कोरोना की छुट्टियां होंगी और विद्यालय बंद हो जाएगा। तो मैं तुम्हें अपना मोबाइल नंबर भी नहीं दे सकती क्योंकि मेरे पास खुद का कोई मोबाइल नहीं है, और लास्ट में लिखा हुआ था I love you
और लिखा हुआ था कि फिर मिलेंगे तो उसके दूसरे दिन ही छुट्टियां पड़ गई। कोरोनावायरस की वजह से घर आ गया और मेरा इश्क अधूरा रह गया।

 


कुछ रंग प्यार के ऐसे भी – Love Story in Hindi

 

कहानी की शुरुआत होती है एक कॉलेज से जहां एक लड़की है जो कि एक बहुत ही पावरफुल बैकग्राउंड से बिलॉन्ग करती है, उसके लिए किसी को मारना पीटना आम बात है। उसके साथ हमेशा एक दो गुंडे रहते ही हैं। उसी कॉलेज में सीधा साधा सा लेकिन बिल्कुल हीरो जैसा स्मार्ट लड़का राहुल पढता है, कॉलेज की लगभग सभी लड़कियां राहुल के पीछे पड़ी रहती हैं। लेकिन उसे तो सनाया से प्यार था। लेकिन राहुल बहुत डरता था फिर भी हिम्मत करते हुए एक दिन सनाया से अपने दिल की बात कह ही दी राहुल ने । लेकिन सनाया ने उसकी बात सुनकर उसका बहुत मजाक बनाया। सनाया कहती है प्यार और वो भी तुम से राहुल । ये कभी नहीं हो सकता राहुल पहले अपनी औकात देखो कहाँ तुम और कहाँ मै। बहुत अंतर है तुम्हारे और मेरे बीच ।

उसके बाद से राहुल बहुत उदास रहने लगा। उधर सनाया और भी मार पिटाई करने लगी थी। लेकिन अब वो राहुल के सामने सीधी-सादी रहने की कोशिश करती। और वह राहुल के बारे में सोचती रहती। वह रहती तो बहुत सारे लोगों के बीच में फिर भी सोचती हो राहुल के बारे में ही थी। धीरे धीरे ही सही सनाया भी राहुल से प्यार करने लगी थी ।

कुछ दिन बाद सनाया को इसका एहसास हुआ कि वह भी राहुल से प्यार करने लगी है। तो उसने अपने बेबाक अंदाज में जाकर राहुल को प्रपोज कर दिया, सनाया ने राहुल से कहा, राहुल देख मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूं, अब तू भी मुझसे प्यार कर ठीक है। चल अब मैं चलती हूं। ये कह कर के सनाया वहां से चली जाती है। वह भी राहुल का जवाब सुने बिना, कुछ देर बाद फिर से राहुल को कॉल करके पूछती है कि तूने तो बताया नहीं तुम मुझसे प्यार करता है कि नहीं।

सनाया के ये पूछने पर राहुल हंसने लगता है और कहता है कल कॉलेज में बात करेंगे। इतना कह कर वो फोन काट देता है । सनाया को रात भर नींद नहीं आती है । सनाया सोचती है की कही राहुल मना न कर दे क्योकि मैंने उसका बहुत मजाक उड़ाया था जब राहुल ने मुझे प्रपोज़ किया था । सनाया के यही सब सोचते सोचते सुबह हो जाती है । सनाया जल्दी जल्दी तैयार होकर कॉलेज जाती है ।

अगले दिन शनाया राहुल का बेसब्री से इंतजार कर रही होती है। तभी राहुल आ जाता है। राहुल को देखकर सनाया राहुल की तरफ तेजी से दौड़ती है और उसे गले लगाने वाली होती है कि उसके पांव खुद-ब-खुद रुक जाते हैं। वह सरमा के दूर खड़ी हो जाती है। राहुल उसके पास जाता है और पूछता है कि आप रुक क्यों गए उसने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही, इसी तरह राहुल और सनाया की लव स्टोरी शुरू हो जाती है।

अब सनाया राहुल के सामने बिल्कुल सीधी बन के रहने लगी, जब राहुल उसके साथ रहता तो वह कोई भी गलत काम नहीं करती। लेकिन जैसे ही राहुल चला जाता वैसे ही वह अपने गुंडों वाले लुक में आ जाती है और गुंडागर्दी शुरु कर देती थी। ऐसे ही उनकी मुलाकाते बढ़ती रही और उनका प्यार परवान चढ़ता गया।

अब सनाया लोगों के छोटे-मोटे झगड़ो से लेकर किसी को मारने तक का काम भी करने लगी थी। लेकिन यह बात राहुल को नहीं पता थी। एक दिन राहुल और सनाया एक साथ बैठे होते हैं तभी सनाया के गुंडे का फोन उसके पास आता है और वह सनाया से कहता है कि उसके पास एक लड़की आई है। और किसी लड़के की फोटो लेकर आई है। उस लड़के के मारने के पैसे दे रही है।

सनाया कहती है कोई नहीं तू पैसे ले ले और उसे काम तमाम कर दे। फिर कुछ देर बाद राहुल वहां से अपने घर की ओर जाता है। और सनाया अपने गुंडों के पास जाती है लेकिन वह लोग उस लड़के को मारने के लिए निकल चुके होते हैं। लेकिन लड़के की एक फोटो वहीं पर छोड़ गए होते हैं। जिसे देखकर सनाया के हाथ पैर फूलने लगते हैं। क्योंकि वह फोटो किसी और की नहीं राहुल की होती है।

सनाया तुरंत उस गुंडे को फोन करती है जो कि राहुल को मारने गया होता है। लेकिन वह उस वक्त वह फोन नहीं उठाता, कुछ देर बाद वह जब फोन रिसीव करता है तो सनाया से कहता है दीदी काम हो गया मैंने लड़के को ठिकाने लगा दिया। यह बात सुनकर वह दौड़ते हुए वहां पहुंचती है लेकिन अब तो बहुत देर हो चुकी होती है। राहुल तू इस दुनिया को छोड़ कर जा चुका होता है। सनाया बहुत जोर से रोने लगती है और उन गुंडों से कहती है कि मुझे भी गोली मार दो।

लेकिन वह लोग अपनी दीदी को गोली नहीं मार पाते । सनाया उसके हाथ से बंदूक छीन के अपने आपको स्वयं गोली मार लेती है।

दोस्तों आप को ये प्यार की एक सच्ची कहानी कैसी लगी । ये हमे आप कमेंट के माध्यम से जरूर बताना। और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों में शेयर करना ताकि वो भी अपनी जिंदगी में सही फैसला ले सके। और हम आपको बता दे की हम ऐसी ही प्यार की कहानिया आप तक पहुंचते रहेंगे ।

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