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माँ का बैंक बैलेंस Motivational Story in hind

Motivational Story in hind
Written by Pooja

 

माँ  मैंने आपको 30,000 पापा से किसी तरह लेकर ए .सी.लगवाने को दिए थे, पर यह क्या आपने अपने घर में बर्तन धोने वाली को उसके बेटे के इलाज के लिए दे दिए।आपकी यह समाज सेवा हमारे लिए सर दर्द बनती जा रही है। जरा देखो रघु चाचा को कितने आलीशान बंगले में रहते हैं सारी सुख सुविधाएं है उनके पास बैंक बैलेंस भी अच्छा खासा है।

पिताजी की चाचा से तनख्वाह ज्यादा होने पर भी हम वही के वही है आप मुझे जरा एक बात बताना भविष्य के लिए क्या जोड़ रखा है अखिल बाहर से आकर एक सांस में माँ से बोले जा रहा था। सुनीता सवाल सुन मन में छिपी शांति ले चुप ही रही इतना सब कुछ सुन लेने के बाद भी वह कभी परेशान ना होती।

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अपने कामों से सुनीता को शांति मिलती। अभी पिछले दिनों पड़ोस में रहने वाले जग्गू चाचा के बेटे को शहर में आईटीआई में एडमिशन करवाने के लिए और शहर में रहने के लिए पैसों की जरूरत आ पड़ी इंतजाम हो जाएगा।इसी आशा में जग्गू ने आखिरी दिन तक किसी को नहीं बताया, तब अचानक सुनीता को पता चला तो अपनी बेटी की स्कूटी के लिए रखे पैसे निकाल कर तुरंत जग्गू चाचा को बेटे के साथ शहर में भेजा पता था सुनैना नाराज होगी, पर किसी के भविष्य से बड़ी इच्छापूर्ति नहीं।

बेटा कभी कभी सोचता हमेशा हम दोनों भाई बहनों से माँ  बचपन में कहती थी मैं कभी तुम दोनों को हारता नहीं देख सकती बचपन में अपने साथ खेलती हुई मां को याद कर अखिल अपने बचपन मैं पहुंच मुस्कुराने लगा।

एक बार जब वह सुनैना के साथ लूडो खेल रहा था। सुनैना के बार बार जीतने पर जब वह रोने लगा तो मां ने पूछा तो बताया की सुनैना बार बार जीतकर मुझे हरा देती है। वायदा किया था कि मैं तेरे को कभी हारने नहीं दूंगी, और सुनैना की जगह मेरे साथ खुद खेलने लगी और जब ताली बजा कर मैंने अपने आप को विजेता बनने का शोर मचाया गले लगा कर कितना प्यार किया था।

माँ का लाड-प्यार सब याद है अखिल को पर अपनी इच्छाओं के पंख कुचलना उस को रास नहीं आता। अखिल को याद आता है आठवीं कक्षा में नई किताब लिए बिना स्कूल जाने से मना कर दिया था क्योंकि उसकी नई किताबों के पैसे माँ ने सुखपाल चाचा के बेटे को एडमिशन के लिए दे दिए। अखिल को दीदी की पुरानी किताबों से पढ़ना पड़ा धीरे-धीरे इच्छाओं को मारकर दोनों भाई बहन बड़े होने लगे।

मां की समाजसेवा तो कम ना हुई पर अब वह बीमार रहने लगी है। धन्नो चाची बीमार है और उनके बेटे बाहर हैं चाची के बीमार होने की खबर से अपनी बीमारी भूल गई। समय बढ़ता जा रहा था। एक बहुत अच्छी कंपनी के इंटरव्यू के लिए अखिल को बेंगलुरु जाना था। समय कम होने के कारण तत्काल हवाई यात्रा की टिकट के लिए पैसों के इंतजाम के बारे में सोच कर परेशान हो उठा ।माँ से मांगने के बारे में सोचना ही फालतू लगा अखिल को।

इस जॉब से अपने सारे सपने पूरे होते लगे। अखिल की  माँ  की दूसरों की सहायता करने की भावना ने अखिल और सुनैना को संघर्षशील जरूर बना दिया था पर सामने रघु चाचा की चमक दमक देख मन के किसी कोने में अजीब सी संकीर्णता जागती रहती।

सुनैना की शादी के लिए कुछ भी ना जुड़ा था सुनीता के पास। स्कूल में टीचर होने के साथ-साथ सुनैना कंपटीशन की भी तैयारी कर रही थी पर अपनी बिरादरी में शादी के लिए दान दहेज की चिंता की माँ को सताने लगी। अखिल के पिता ने अपनी इमानदारी और कर्मठता से अपने को और परिवार को सींचा था। शांत स्वभाव और ध्यान से सबको सुनने की आदत के कारण सबके प्रिय तो बन गए पर हमारे समाज में आदमी पैसों से सहायता उसकी ही करता है जिससे पैसों की उम्मीद हो कर्मठता भरी नौकरी में बैंक बैलेंस ना बना सके संतोष बाबू।

बिरादरी की शादियों में दान दहेज में सोना और दिखावे का बोलबाला होता है लड़की की शादी में लड़की की योग्यता नहीं बैंक बैलेंस चाहिए होता है। अखिल के पिता संतोष बाबू को समझ में आने लगा था। एक दिन जब जग्गू चाचा मंदिर में अखिल को मिले, और पूछने लगे घर परिवार के बारे में और अखिल के जॉब के बारे में तब अखिल ने चाचा को अपने मन को हल्का करने के लिए सब कुछ बताया।

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अचानक अपने फोन पर बेंगलुरु की टिकट को देखकर अखिल हैरान रह गया। फ्लाइट को पकड़ने के लिए उसके पास बहुत कम समय था। घर आकर जल्दी से अपनी डॉक्यूमेंट की फाइल उठाकर और इंटरव्यू के लिए कपड़ों और जरूरी सामान की पैकिंग कर और माँ  को जल्दी से सफर के खाने की पैकिंग करने को कहा। माँ  जल्दी से पराठे और आचार ही रख दो और हां दो चार पराठे ज्यादा ही रखना जल्दी से फ्लाइट पकड़नी है। नया शहर है बहुत जल्दी है। माँ  फ्लाइट की टिकट सुन हैरान जरूर हुई जल्दी जल्दी करके पराठे और अचार रास्ते के खाने के लिए पैक कर दिया। अखिल ने जल्दी-जल्दी मां पापा के पैर छुए आशीर्वाद लेकर अपना सामान ले टैक्सी से एयरपोर्ट पहुंचा और फ्लाइट से बेंगलुरु पहुंचा।

एयरपोर्ट पर बाहर आकर देखा उसके नाम और फोन नंबर की प्लेट लिए एक व्यक्ति उसका इंतजार कर रहा था। पूछने पर उसने बताया जिस कंपनी में आप इंटरव्यू देने जा रहे हैं वहां के मालिक ने आपके लिए गाड़ी भेजी है। नए शहर में किसी पर विश्वास करना आसान ना था। इस जॉब से उसके सभी सपने जो जुड़े थे। उसके पास खोने के लिए कुछ भी ना था कुछ भी ज्यादा सोचे बिना गाड़ी में बैठ गया नियत दूरी तय कर गाड़ी से अखिल कंपनी में पहुंचा।

वहां उसका स्वागत कंपनी के मालिक ने ही किया। हैरान अखिल कंपनी के मालिक के साथ नाश्ता करने में बड़ा गर्व महसूस कर रहा था। अचानक कंपनी के मालिक ने कहा सर चलिए आपको आपकी सीट तक ले चलूं सर शब्द सुनकर अखिल हैरान हो गया। अखिल की हैरानी बढ़ती जा रही थी कि  मालिक ने अपने आलीशान ऑफिस के कुर्सी पर बैठने के लिए अखिल को कहा नहीं सर अखिल के मुंह से निकला।

कंपनी के मालिक ने अपनी आंखों की नमी को पूछते हुए कहा भैया आपने पहचाना नहीं यह जो सब आप देख रहे हैं यह आपकी माँ  के दया धर्म का ही परिणाम है। आपकी बहन के स्कूटर को खरीदने के लिए रखे पैसों को जग्गू चाचा के बेटे के लिए यानी मेरे एडमिशन के लिए जो माँ जी ने पैसे दिए थे यह मैं उसी का ब्याज दे रहा हूं।

माँ  की ममता को तो मैं नहीं लौटा सकता पर उन पैसों का ब्याज तो लौटा ही सकता हूं।

आईआईटी करके मैंने कुछ ईमानदार साथियों की मदद से एक फैक्ट्री खोली और गांव के बेरोजगार लड़के लड़कियों की लगन और मेहनत से या फैक्ट्री चमक उठी।

यह वह बेरोजगार हैं जिनके पास डिग्री थी और काम को अपनी लगन से चमकाने का जज्बा था। पर अनुभव की कमी से इनको बड़ी कंपनियां काम नहीं देती थी और काम पर रखती तो उसकी तनख्वाह न देती मैंने इन कारीगरों को इनकी मेहनत का पूरा पैसा सम्मान के साथ दिया। इन सब की मेहनत और माँ -बाप की आशीर्वाद से इस फैक्ट्री के माल की डिमांड बढ़ती गई इसका परिणाम आपके सामने हैं

यह आपकी माँ का बैंक बैलेंस है आपको ब्याज के साथ आपको सौंप  रहा हूं और हां मैं आपके माँ -पिताजी से आपकी बहन का हाथ मांगना चाहता हूं। आपकी बहन के स्कूटी खरीदने के लिए रखे गए पैसों से आपकी बहन के सपने को छिन्न-भिन्न कर मैंने आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाए आपकी बहन को सुख सौभाग्य दे सकूं तो यह मेरा सौभाग्य होगा। माँ की ममता का कर्ज तो मैं कभी झुका ही नहीं सकता पर माँ की ममता की छांव में रहने की तो याचना कर ही सकता हूं।

अखिल हैरान और स्तब्ध हो सब सुन रहा था आंखों से बहते आंसू माँ  के चरणों तक पहुंचने को आतुर हो रहे थे। माँ के बैंक बैलेंस को संभालने के लिए कंपकपाते हाथों से प्रभु के स्मरण में जोड़कर ऐसी माँ  हर जन्म में देने के लिए याचना करने लगा। और माँ की गोद में लीन होने के लिए छोटा बच्चा बन जाना चाह रहा था।

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